रूस ने 2016 के राष्ट्रपति चुनावों में डोनल्ड ट्रंप की टीम के साथ सांठ-गांठ की थी कि नहीं, इस मामले में जाँच रिपोर्ट गुरुवार को जारी की गई.
रिपोर्ट से पता चला है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने उनके रूस के साथ सांठ-गांठ के आरोपों की जाँच करने वाले विशेष वकील रॉबर्ट मुलर को हटाने की कोशिश की थी.
448 पन्नों की इस रिपोर्ट में ट्रंप की टीम को रूस के साथ सांठ-गांठ के आरोप पर क्लीन चिट दी गई है. हालांकि जांच में रोड़े अटकाने के आरोपों पर इसमें कोई ठोस निष्कर्ष नहीं दिया गया है.
गुरुवार को व्हाइट हाउस ने 448 पन्नों की इस रिपोर्ट के प्रमुख हिस्सों को जारी किया. ट्रंप की क़ानूनी टीम ने इस रिपोर्ट को अपनी जीत बताया है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्विटर पर एक तस्वीर पोस्ट की है, जिस पर लिखा है, 'कोई सांठ-गांठ नहीं. कोई बाधा नहीं. खेल ख़त्म. '
विशेष वकील रॉबर्ट मुलर ने करीब दो साल की जांच के बाद ये रिपोर्ट तैयार की है.
रिपोर्ट जारी करते हुए अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने कहा कि इसमें न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने के आरोपों के बारे में, ट्रंप से जुड़े 10 मामलों की जांच की गई थी.
डेमोक्रेट सदस्यों ने पूरी रिपोर्ट को जारी करने के साथ मुलर को कांग्रेस के सामने पेश होने की मांग की है.
रिपोर्ट में कहा गया है, "हालांकि जांच में रूसी सरकार और ट्रंप के प्रचार अभियान से जुड़े व्यक्तियों के बीच के कई संबंधों को चिह्नित किया, लेकिन आपराधिक किस्म के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले."
ट्रंप की क़ानूनी टीम ने बयान में कहा है कि जांच के नतीजे राष्ट्रपति के लिए अंतिम जीत है. रिपोर्ट में वही आया है जो हम शुरुआत से कह रहे थे.
बयान में कहा गया है कि 17 महीनों की जांच, 500 गवाहों के बयान, 500 तलाशी वारंट, 14 लाख पन्नों की जांच और राष्ट्रपति की तरफ़ से अभूतपूर्व सहयोग के बाद ये साफ़ हो गया है कि इसमें कोई भी आपराधिक ग़लती नहीं हुई है.
और क्या कहती है रिपोर्ट
हालांकि रिपोर्ट में लिखा है कि डोनल्ड ट्रंप ने मुलर को पद से हटाने के लिए जून 2017 में व्हाइट हाउस के पूर्व वकील डॉन मैकगान से संपर्क किया था.
इस पर मैकगान ने स्पेशल काउंसल को बताया कि उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया क्योंकि वो फंसा हुआ महसूस कर रहे थे. उनके मुताबिक, 'वो राष्ट्रपति के निर्देशों का पालन नहीं करना चाहते थे और उन्हें ये भी समझ नहीं आ रहा था कि दोबारा ट्रंप का फोन आने पर वे उन्हें क्या कहेंगे.'
रिपोर्ट के मुताबिक
जांच का एलान किए जाने के बाद ट्रंप ने कथित तौर पर एक अपशब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा, "ओह माय गॉड. ये बहुत बुरा है. ये मेरे राष्ट्रपति काल का अंत है."
रॉबर्ट मुलर ने न्याय में बाधा पहुंचाने के संबंध में ट्रंप की ओर से दस कथित कोशिशों की जांच की है.
जांचकर्ताओं ने ट्रंप के लिखित जवाबों को 'नाकाफ़ी' बताया है लेकिन यह भी कहा है कि एक लंबी क़ानूनी लड़ाई से बचने के लिए उनसे आमने-सामने पूछताछ के विकल्प को आगे नहीं बढ़ाया गया.
ट्रंप ने जून 2016 में अपने प्रचार अधिकारियों और रूसी मध्यस्थों के बीच हुई मुलाक़ात के बारे में ग़लत जानकारी दी
Friday, April 19, 2019
Monday, April 15, 2019
इल्हान ओमर: 9/11 को फिर से चर्चा में लाने वाली मुस्लिम अमरीकी नेता
9/11 के हमलों के बारे में की गई अपनी टिप्पणी के बाद आलोचना का शिकार हुईं डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता इल्हान ओमर ने कहा है कि वो चुप नहीं रहेंगी.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें इल्हान ओमर के दिए भाषण के कुछ अंश और 11 सितंबर 2011 में अमरीका के ट्विन टावर पर हुए आतंकी हमले के वीडियो हैं. ट्रंप ने लिखा, "हम ये कभी नहीं भूलेंगे."
वीडियो में कई जगहों पर इल्हान ओमर कह रही हैं, 'कुछ लोगों ने कुछ किया' (सम पीपल डिड समथिंग) और उनके बयान के बीच में कई जगहों पर विमान के इमारत से टकराने और उनके गिरने के वीडियो हैं.
रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं का आरोप है कि इल्हान ओमर ने 9/11 हमलों को कमतर कर पेश किया है. डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता इल्हान के बचाव में आ गए हैं. उनका कहना है कि इल्हान के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है. कईयों ने ट्रंप पर इल्हान ओमर और मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप भी लगाए हैं.
कौन हैं इल्हान ओमर?
बीते साल नवंबर में हुए चुनावों में मिनेसोटा से जीतकर इल्हान ओमर हाइस ऑफ़ रिप्रेज़ेन्टेटिव्स में आई थीं. वो पहली दो मुसलमान महिलाओं में से एक हैं जो अमरीकी कांग्रेस तक पहुंची हैं.
इल्हान मूल रूप से सोमालिया की हैं. सोमालिया से पलायन कर उनका परिवार अमरीका में शरणार्थी के तौर पर बस गया था. इल्हान हिजाब पहनने वाली कांग्रेस की पहली नेता हैं.
हाइस ऑफ़ रिप्रेज़ेन्टेटिव में इल्हान नई हैं लेकिन ये पहली बार है जब वो चर्चा में आई हैं. इसराइल और इसराइल समर्थकों के बारे में उनके एक बयान के कारण उन पर यहूदी विरोधी भावना से प्रेरित होने का आरोप लगाया गया था.
लेकिन आलोचना के बाद उन्होंने माफ़ी मांगी और कहा कि वो अभी 'सीख रही हैं.'
एक पोस्टर में इल्हान को ट्विन टावर के पास में खड़ा दिखाया गया था जिसके बाद उन्होंने इस पर आपत्ति जताई थी कि उन्हें मुसलमान विरोधी के रूप में दिखाने की कोशिश हो रही है.
बीते सप्ताह पुलिस ने न्यूयॉर्क में 55 साल की एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था जिन्होंने कथित तौर पर इल्हान के दफ़्तर में फ़ोन कर उन्हें 'आतंकवादी' कहा और आत्महत्या करने की धमकी दी थी.
इल्हान ओमर के जिस भाषण के कुछ अंश राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्वीट किए हैं वो मानवाधिकार समूह काउंसिल ऑफ़ अमरीकन-इस्लामिक रीलेशन्स (सीएआईआर) के एक सम्मेलन में दिए भाषण से लिए गए थे. यह सम्मेलन 23 मार्च को हुआ था.
अपने 20 मिनट लंबे भाषण में इल्हान ओमर ने मुसलमान समुदाय के ख़िलाफ़ इस्लामोफ़ोबिया और हाल में न्यूज़ीलैंड की मस्जिदों पर हुए हमलों जैसे मुश्किल हालातों पर चर्चा की थी.
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने ट्विटर हैंडल पर जो वीडियो पोस्ट किया था उसमें इल्हान ओमर के शब्द उस जगह से लिए गए थे जहां वो सितंबर 2011 के हमलों के बाद अमरीका में मुसलमानों के साथ व्यवहार के बारे में बता रही हैं.
उनका बयान था, "ये सच है लंबे वक्त से हम इस परेशानी के साथ जी रहे हैं कि हमारे साथ दोयम दर्जे के नागरिक जैसा व्यवहार होता है. सच कहूं तो मैं अब इससे थक चुकी हूं और मुझे लगता है कि इस देश में रहने वाले भी अब थक चुके हैं. सीएआईआर की स्थापना 9/11 के हमलों के बाद हुई थी क्योंकि उन्हें लगा कि कुछ लोगों ने कुछ किया और हम सभी के नागरिक अधिकार ख़त्म होने लगे थे."
बाद में वॉशिंगटन पोस्ट अख़बार ने अपनी जांच में पाया कि सीएआईआर की स्थापना 1994 में हुई थी. बाद में इल्हान ओमर की प्रवक्ता ने एक अख़बार से कहा कि इल्हान ने ग़लती से बयान दिया था और उनका मतलब था कि हमलों के बाद इस संस्था में काम करने वालों की संख्या काफ़ी बढ़ाई गई थी.
विवाद क्या था और कैसे बढ़ा?
इल्हान ओमर की स्पीच के बारे में तब चर्चा शुरू हुई जब 9 अप्रैल को टेक्सस से रिपब्लिकन नेता डैन क्रैनशॉ ने वीडियो जारी किया और इसे 'यकीन नहीं करने लायक' बताया.
इसके बाद फ़ॉक्स न्यूज़ समेत कई मीडिया चैनलों ने इसे रिपोर्ट करना शुरू किया और इस पर चर्चा की.
रिपब्लिकन नेशनल कमिटी की रॉना मैकडेनियल ने इल्हान ओमर को 'अमरीका विरोधी' बताया.
इसके बाद इल्हान ओमर ने कहा कि उन्हें मिल रही आलोचना 'ख़तरनाक है और उन्हें मौत की धमकी भी मिल रही है.'
उन्होंने अपने बयान की तुलना सितंबर 2011 के हमलों के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के बयान से की जिसमें उन्होंने कहा था कि "पूरी दुनिया आपको सुन रही है और जिन लोगों ने इन इमारतों को गिराया है वो भी जल्द ही हमारी आवाज़ सुनेंगे."
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें इल्हान ओमर के दिए भाषण के कुछ अंश और 11 सितंबर 2011 में अमरीका के ट्विन टावर पर हुए आतंकी हमले के वीडियो हैं. ट्रंप ने लिखा, "हम ये कभी नहीं भूलेंगे."
वीडियो में कई जगहों पर इल्हान ओमर कह रही हैं, 'कुछ लोगों ने कुछ किया' (सम पीपल डिड समथिंग) और उनके बयान के बीच में कई जगहों पर विमान के इमारत से टकराने और उनके गिरने के वीडियो हैं.
रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं का आरोप है कि इल्हान ओमर ने 9/11 हमलों को कमतर कर पेश किया है. डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता इल्हान के बचाव में आ गए हैं. उनका कहना है कि इल्हान के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है. कईयों ने ट्रंप पर इल्हान ओमर और मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप भी लगाए हैं.
कौन हैं इल्हान ओमर?
बीते साल नवंबर में हुए चुनावों में मिनेसोटा से जीतकर इल्हान ओमर हाइस ऑफ़ रिप्रेज़ेन्टेटिव्स में आई थीं. वो पहली दो मुसलमान महिलाओं में से एक हैं जो अमरीकी कांग्रेस तक पहुंची हैं.
इल्हान मूल रूप से सोमालिया की हैं. सोमालिया से पलायन कर उनका परिवार अमरीका में शरणार्थी के तौर पर बस गया था. इल्हान हिजाब पहनने वाली कांग्रेस की पहली नेता हैं.
हाइस ऑफ़ रिप्रेज़ेन्टेटिव में इल्हान नई हैं लेकिन ये पहली बार है जब वो चर्चा में आई हैं. इसराइल और इसराइल समर्थकों के बारे में उनके एक बयान के कारण उन पर यहूदी विरोधी भावना से प्रेरित होने का आरोप लगाया गया था.
लेकिन आलोचना के बाद उन्होंने माफ़ी मांगी और कहा कि वो अभी 'सीख रही हैं.'
एक पोस्टर में इल्हान को ट्विन टावर के पास में खड़ा दिखाया गया था जिसके बाद उन्होंने इस पर आपत्ति जताई थी कि उन्हें मुसलमान विरोधी के रूप में दिखाने की कोशिश हो रही है.
बीते सप्ताह पुलिस ने न्यूयॉर्क में 55 साल की एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था जिन्होंने कथित तौर पर इल्हान के दफ़्तर में फ़ोन कर उन्हें 'आतंकवादी' कहा और आत्महत्या करने की धमकी दी थी.
इल्हान ओमर के जिस भाषण के कुछ अंश राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्वीट किए हैं वो मानवाधिकार समूह काउंसिल ऑफ़ अमरीकन-इस्लामिक रीलेशन्स (सीएआईआर) के एक सम्मेलन में दिए भाषण से लिए गए थे. यह सम्मेलन 23 मार्च को हुआ था.
अपने 20 मिनट लंबे भाषण में इल्हान ओमर ने मुसलमान समुदाय के ख़िलाफ़ इस्लामोफ़ोबिया और हाल में न्यूज़ीलैंड की मस्जिदों पर हुए हमलों जैसे मुश्किल हालातों पर चर्चा की थी.
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने ट्विटर हैंडल पर जो वीडियो पोस्ट किया था उसमें इल्हान ओमर के शब्द उस जगह से लिए गए थे जहां वो सितंबर 2011 के हमलों के बाद अमरीका में मुसलमानों के साथ व्यवहार के बारे में बता रही हैं.
उनका बयान था, "ये सच है लंबे वक्त से हम इस परेशानी के साथ जी रहे हैं कि हमारे साथ दोयम दर्जे के नागरिक जैसा व्यवहार होता है. सच कहूं तो मैं अब इससे थक चुकी हूं और मुझे लगता है कि इस देश में रहने वाले भी अब थक चुके हैं. सीएआईआर की स्थापना 9/11 के हमलों के बाद हुई थी क्योंकि उन्हें लगा कि कुछ लोगों ने कुछ किया और हम सभी के नागरिक अधिकार ख़त्म होने लगे थे."
बाद में वॉशिंगटन पोस्ट अख़बार ने अपनी जांच में पाया कि सीएआईआर की स्थापना 1994 में हुई थी. बाद में इल्हान ओमर की प्रवक्ता ने एक अख़बार से कहा कि इल्हान ने ग़लती से बयान दिया था और उनका मतलब था कि हमलों के बाद इस संस्था में काम करने वालों की संख्या काफ़ी बढ़ाई गई थी.
विवाद क्या था और कैसे बढ़ा?
इल्हान ओमर की स्पीच के बारे में तब चर्चा शुरू हुई जब 9 अप्रैल को टेक्सस से रिपब्लिकन नेता डैन क्रैनशॉ ने वीडियो जारी किया और इसे 'यकीन नहीं करने लायक' बताया.
इसके बाद फ़ॉक्स न्यूज़ समेत कई मीडिया चैनलों ने इसे रिपोर्ट करना शुरू किया और इस पर चर्चा की.
रिपब्लिकन नेशनल कमिटी की रॉना मैकडेनियल ने इल्हान ओमर को 'अमरीका विरोधी' बताया.
इसके बाद इल्हान ओमर ने कहा कि उन्हें मिल रही आलोचना 'ख़तरनाक है और उन्हें मौत की धमकी भी मिल रही है.'
उन्होंने अपने बयान की तुलना सितंबर 2011 के हमलों के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के बयान से की जिसमें उन्होंने कहा था कि "पूरी दुनिया आपको सुन रही है और जिन लोगों ने इन इमारतों को गिराया है वो भी जल्द ही हमारी आवाज़ सुनेंगे."
Monday, April 8, 2019
करुणानिधि की विरासत संभालने की चुनौती
पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके के अध्यक्ष करुणानिधि के अगस्त, 2018 में हुए निधन के बाद से तमिलनाडु की राजनीतिक पटल पर बहुत बदलाव देखने को मिला है.
हालांकि कहा जा सकता है कि इस बदलाव की शुरुआत एडीएमके सुप्रीमो और तत्कालीन मुख्यमंत्री रहीं जयललिता के दिसंबर, 2016 में हुए निधन से ही हो गई थी. लेकिन तमिलनाडु की राजनीति में करुणानिधि वह एक शख्स रहे, जिनके बिना यहां की राजनीति की बात संभव नहीं है.
डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) पार्टी ने 1967 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को राज्य की सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया था.
उस वक्त सीएन अन्नदुरै ने सत्ता संभाली और प्रदेश के मुख्यमंत्री बने लेकिन साल 1967 में उनकी मौत हो गई.
इसके बाद 1969 में यानी से आज से पचास साल पहले, करुणानिधि ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, साथ ही वे डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के अध्यक्ष भी बने.
करुणानिधि के निधन के बाद उनकी जगह लेना या फिर पार्टी की कमान संभालना, किसी भी नेता के लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी है.
एम करुणनिधि के तीसरे बेटे, एमके स्टालिन (मुथुवेल करुणानिधि स्टालिन) के लिए यह जिम्मेदारी कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि उनकी पार्टी बीते आठ साल से सत्ता में नहीं है.
स्टालिन में ना तो जयललिता जैसा करिश्मा है और ना ही अपने पिता करुणानिधि की तरह वे भाषण देने निपुण हैं. लेकिन काम करने का उनका अपना अंदाज है. इसकी झलक उन्होंने करुणानिधि के निधन के तुरंत बाद दिखाई थी.
07 अगस्त, 2018 को करुणानिधि का निधन हुआ था, इसके बाद जब राज्य सरकार ने करुणानिधि के अंतिम संस्कार के लिए मरीना बीच पर जगह नहीं दी तो डीएमके कैडर-समर्थक उपद्रव पर उतर आए थे.
डीएमके इस मामले को कोर्ट में ले गई. चेन्नई हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि करुणानिधि का अंतिम संस्कार मरीना बीच पर हो सकता है, जब यह फैसला आया उस वक्त लोग राजाजी हाल में अपने नेता को श्रदांजलि दे रहे थे, हाईकोर्ट का फैसला आते ही समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई.
लेकिन तब लोगों ने देखा कि करुणानिधि के बेटे और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन दोनों हाथ जोड़े, अपने कैडरों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे थे. करुणानिधि के अंतिम संस्कार के दौरान वे पूरी तरह से संयत नजर आए, अपनी भावनाओं पर काबू रखे हुए.
इसी स्टालिन ने अपने पिता के निधन के दिन एक बेहद भावनात्मक खत लिखा था. उस खत में उन्होंने लिखा था, "अपने पूरे जीवन में मैं आपको अप्पा (पिता) से ज्यादा थलेइवा (नेता) कह कर पुकारता रहा. अब क्या एक बार आपको अप्पा बुला सकता हूं, थलेइवा?"
इन पूरे घटना ने स्टालिन की छवि के पॉजिटिव रुख को लोगों के सामने रखा, हालांकि अभी कोई ये भी कह सकता है कि अभी ऐसा कहना जल्दबाज़ी होगी.
लेकिन स्टालिन के राजनीतिक करियर में सबसे बड़ा मुकाम आना अभी बाकी था. ये मुकाम 28 अगस्त, 2018 को तब आया जब वे डीएमके काउंसिल की बैठक में निर्विरोध पार्टी अध्यक्ष चुन लिए गए. वे अब उस शख्स की जगह ले चुके थे, जो ना केवल उनके पिता थे बल्कि ऐसे नेता थे जिन्होंने अपनी पार्टी का तमाम उतार चढ़ाव के बीच 50 सालों तक नेतृत्व किया था.
1970 के दशक के शुरुआती सालों में स्टालिन ने पार्टी में अपनी शुरुआत की. लेकिन तब उनकी पहचान मुख्यमंत्री करुणानिधि के बेटे भर की थी.
मीसा (एमआईएसए) आंदोलन के 1975 में वे गिरफ्तार भी हुए और जेल के अंदर उनको प्रताड़ित किए जाने की ख़बरें भी आईं. इनसे पार्टी कैडरों में उनका सम्मान बढ़ा, लोगों की संवेदना भी उनसे जुड़ीं.
इसके बाद स्टालिन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. स्टालिन अगस्त, 2018 में पार्टी के अध्यक्ष बने. लेकिन यहां तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं रहा. उन्हें तमाम तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा.
उन्होंने अपने स्कूली दिनों से ही राजनीति शुरू कर दी थी. उन्होंने चेन्नई के गोपालापुरम में पार्टी के यूथ विंग का निर्माण किया और पार्टी के सिद्धांतों से उन्हें जोड़ा.
1970 के शुरुआती सालों में स्टालिन युवाओं को अपनी पार्टी की बैठकों में आने के लिए प्रोत्साहित करते और अपनी पार्टी का चुनाव प्रचार भी करते.
1980 में करुणानिधि ने पार्टी के यूथ विंग की शुरुआत मदुरै में की थी. स्टालिन इसके शुरुआती संयोजक थे. 1984 में उन्हें यूथ विंग का सचिव बनाया गया. स्टालिन लंबे समय तक इस पद पर बने रहे.
1984 में पहली बार स्टालिन विधानसभा का चुनाव लड़े, हालांकि थाउजेंड लाइट्स क्षेत्र से वे एडीएमके के एक वरिष्ठ नेता के हाथों मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे. हालांकि बाद में वे उसी विधानसभा क्षेत्र से 1989, 1996, 2001 और 2006 का चुनाव जीतने में कामयाब रहे. इस बीच 1991 का चुनाव वे हार भी गए थे.
2006 में जब डीएमके सत्ता में आई तो स्टालिन को राज्य के स्थानीय प्रशासनिक मामलों का मंत्री बनाया गया. वे पांच साल तक इस महकमे के मंत्री रहे और इस दौरान उनकी प्रशासनिक क्षमता की काफी तारीफें हुईं.
इससे पहले 1996 से 2000 के बीच वे चेन्नई के मेयर भी रहे और इस दौरान उनके किए कामों के चलते उन्हें प्रशंसा भी मिली. उन्होंने न केवल शहर के सड़कों की स्थिति में सुधार किया बल्कि आधारभूत ढांचों को भी बढ़ाया जिसके चलते पार्टी के कैडर और आम लोग उन्हें आज भी याद करते हैं.
हालांकि कहा जा सकता है कि इस बदलाव की शुरुआत एडीएमके सुप्रीमो और तत्कालीन मुख्यमंत्री रहीं जयललिता के दिसंबर, 2016 में हुए निधन से ही हो गई थी. लेकिन तमिलनाडु की राजनीति में करुणानिधि वह एक शख्स रहे, जिनके बिना यहां की राजनीति की बात संभव नहीं है.
डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) पार्टी ने 1967 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को राज्य की सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया था.
उस वक्त सीएन अन्नदुरै ने सत्ता संभाली और प्रदेश के मुख्यमंत्री बने लेकिन साल 1967 में उनकी मौत हो गई.
इसके बाद 1969 में यानी से आज से पचास साल पहले, करुणानिधि ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, साथ ही वे डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के अध्यक्ष भी बने.
करुणानिधि के निधन के बाद उनकी जगह लेना या फिर पार्टी की कमान संभालना, किसी भी नेता के लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी है.
एम करुणनिधि के तीसरे बेटे, एमके स्टालिन (मुथुवेल करुणानिधि स्टालिन) के लिए यह जिम्मेदारी कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि उनकी पार्टी बीते आठ साल से सत्ता में नहीं है.
स्टालिन में ना तो जयललिता जैसा करिश्मा है और ना ही अपने पिता करुणानिधि की तरह वे भाषण देने निपुण हैं. लेकिन काम करने का उनका अपना अंदाज है. इसकी झलक उन्होंने करुणानिधि के निधन के तुरंत बाद दिखाई थी.
07 अगस्त, 2018 को करुणानिधि का निधन हुआ था, इसके बाद जब राज्य सरकार ने करुणानिधि के अंतिम संस्कार के लिए मरीना बीच पर जगह नहीं दी तो डीएमके कैडर-समर्थक उपद्रव पर उतर आए थे.
डीएमके इस मामले को कोर्ट में ले गई. चेन्नई हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि करुणानिधि का अंतिम संस्कार मरीना बीच पर हो सकता है, जब यह फैसला आया उस वक्त लोग राजाजी हाल में अपने नेता को श्रदांजलि दे रहे थे, हाईकोर्ट का फैसला आते ही समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई.
लेकिन तब लोगों ने देखा कि करुणानिधि के बेटे और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन दोनों हाथ जोड़े, अपने कैडरों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे थे. करुणानिधि के अंतिम संस्कार के दौरान वे पूरी तरह से संयत नजर आए, अपनी भावनाओं पर काबू रखे हुए.
इसी स्टालिन ने अपने पिता के निधन के दिन एक बेहद भावनात्मक खत लिखा था. उस खत में उन्होंने लिखा था, "अपने पूरे जीवन में मैं आपको अप्पा (पिता) से ज्यादा थलेइवा (नेता) कह कर पुकारता रहा. अब क्या एक बार आपको अप्पा बुला सकता हूं, थलेइवा?"
इन पूरे घटना ने स्टालिन की छवि के पॉजिटिव रुख को लोगों के सामने रखा, हालांकि अभी कोई ये भी कह सकता है कि अभी ऐसा कहना जल्दबाज़ी होगी.
लेकिन स्टालिन के राजनीतिक करियर में सबसे बड़ा मुकाम आना अभी बाकी था. ये मुकाम 28 अगस्त, 2018 को तब आया जब वे डीएमके काउंसिल की बैठक में निर्विरोध पार्टी अध्यक्ष चुन लिए गए. वे अब उस शख्स की जगह ले चुके थे, जो ना केवल उनके पिता थे बल्कि ऐसे नेता थे जिन्होंने अपनी पार्टी का तमाम उतार चढ़ाव के बीच 50 सालों तक नेतृत्व किया था.
1970 के दशक के शुरुआती सालों में स्टालिन ने पार्टी में अपनी शुरुआत की. लेकिन तब उनकी पहचान मुख्यमंत्री करुणानिधि के बेटे भर की थी.
मीसा (एमआईएसए) आंदोलन के 1975 में वे गिरफ्तार भी हुए और जेल के अंदर उनको प्रताड़ित किए जाने की ख़बरें भी आईं. इनसे पार्टी कैडरों में उनका सम्मान बढ़ा, लोगों की संवेदना भी उनसे जुड़ीं.
इसके बाद स्टालिन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. स्टालिन अगस्त, 2018 में पार्टी के अध्यक्ष बने. लेकिन यहां तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं रहा. उन्हें तमाम तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा.
उन्होंने अपने स्कूली दिनों से ही राजनीति शुरू कर दी थी. उन्होंने चेन्नई के गोपालापुरम में पार्टी के यूथ विंग का निर्माण किया और पार्टी के सिद्धांतों से उन्हें जोड़ा.
1970 के शुरुआती सालों में स्टालिन युवाओं को अपनी पार्टी की बैठकों में आने के लिए प्रोत्साहित करते और अपनी पार्टी का चुनाव प्रचार भी करते.
1980 में करुणानिधि ने पार्टी के यूथ विंग की शुरुआत मदुरै में की थी. स्टालिन इसके शुरुआती संयोजक थे. 1984 में उन्हें यूथ विंग का सचिव बनाया गया. स्टालिन लंबे समय तक इस पद पर बने रहे.
1984 में पहली बार स्टालिन विधानसभा का चुनाव लड़े, हालांकि थाउजेंड लाइट्स क्षेत्र से वे एडीएमके के एक वरिष्ठ नेता के हाथों मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे. हालांकि बाद में वे उसी विधानसभा क्षेत्र से 1989, 1996, 2001 और 2006 का चुनाव जीतने में कामयाब रहे. इस बीच 1991 का चुनाव वे हार भी गए थे.
2006 में जब डीएमके सत्ता में आई तो स्टालिन को राज्य के स्थानीय प्रशासनिक मामलों का मंत्री बनाया गया. वे पांच साल तक इस महकमे के मंत्री रहे और इस दौरान उनकी प्रशासनिक क्षमता की काफी तारीफें हुईं.
इससे पहले 1996 से 2000 के बीच वे चेन्नई के मेयर भी रहे और इस दौरान उनके किए कामों के चलते उन्हें प्रशंसा भी मिली. उन्होंने न केवल शहर के सड़कों की स्थिति में सुधार किया बल्कि आधारभूत ढांचों को भी बढ़ाया जिसके चलते पार्टी के कैडर और आम लोग उन्हें आज भी याद करते हैं.
Friday, April 5, 2019
2.52 लाख करोड़ रु. के शेयर लेकर मैकेंजी चौथी सबसे अमीर महिला बनीं, बेजोस फिर भी टॉप पर
वॉशिंगटन. अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस के तलाक की प्रक्रिया पूरी हो गई है। इसके साथ ही मैकेंजी (बेजोस की पूर्व पत्नी) दुनिया की चौथी सबसे अमीर महिला बन गई हैं। उनके हिस्से में अमेजन के 4% शेयर आए हैं। उनकी वैल्यू 36.5 अरब डॉलर (2.52 लाख करोड़ रुपए) है। संयुक्त शेयरों में से मैकेंजी हिस्सा देने के बाद भी जेफ बेजोस 114 अरब डॉलर (7.87 लाख करोड़ रुपए) की नेटवर्थ के साथ दुनिया के सबसे बड़े अमीर बने हुए हैं।
मैकेंजी ने अपने हिस्से के वोटिंग राइट बेजोस को दिए
तलाक के लिए हुए एग्रीमेंट के मुताबिक मैकेंजी संयुक्त शेयरों में से 75% बेजोस को देने और 25% अपने पास रखने के लिए राजी हुईं। दोनों के पास अमेजन के 16% शेयर थे। उनमें से 4% अब मैकेंजी के पास हैं। हालांकि, मैकेंजी ने अपने हिस्से के शेयरों के वोटिंग राइट्स बेजोस को दिए हैं। बेजोस के अखबार वॉशिंगटन पोस्ट और स्पेस कंपनी ब्लू ऑरिजिन में भी उन्होंने कोई हिस्सेदारी नहीं मांगी है।
मैकेंजी अमेजन की तीसरी बड़ी शेयरहोल्डर
मैकेंजी के पास 4% शेयर जाने के बाद जेफ बेजोस के पास अमेजन के 12% शेयर रह गए हैं। वो अमेजन के सबसे बड़े शेयरधारक हैं। दूसरे नंबर पर इन्वेस्टमेंट ग्रुप वेनगार्ड है। मैकेंजी तीसरी सबसे बड़ी शेयरहोल्डर बन गई हैं।
मैकेंजी 50% शेयर लेतीं तो बेजोस दुनिया के सबसे बड़े अमीर नहीं रहते
जेफ बेजोस और मैकेंजी ने इस साल जनवरी में तलाक का ऐलान किया था। उस वक्त कयास लगाए गए कि मैकेंजी दुनिया की सबसे अमीर महिला बन सकती हैं। वॉशिंगटन के कानून के मुताबिक शादी के बाद अर्जित की गई संपत्ति तलाक के समय पति-पत्नी में बराबर बांटी जाती है। ऐसा होता तो जेफ बेजोस दुनिया के अमीरों की लिस्ट में पहले से फिसलकर चौथे नंबर पर आ जाते। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स में माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स (नेटवर्थ 102 अरब डॉलर) दूसरे नंबर पर हैं।
26 साल पहले जॉब इंटरव्यू में पहली बार मिले थे जेफ और मैकेंजी
मैकेंजी उपन्यासकार हैं और उन्होंने दि टेस्टिंग ऑफ लूथर अलब्राइट एवं ट्रैप्स सहित कई किताबें लिखी हैं। साल 1992 में जॉब इंटरव्यू के दौरान जेफ बेजोस से उनकी पहली मुलाकात हुई थी। वो हेज फंड कंपनी डी ई शॉ में इंटरव्यू के लिए गई थीं। जेफ ने ही उनका इंटरव्यू लिया था।
अमेजन की कामयाबी में मैकेंजी की अहम भूमिका
साल 1993 में जेफ और मैकेंजी की शादी हुई थी। उस वक्त दोनों हेज फंड कंपनी डी ई शॉ में काम करते थे। शादी के अगले साल यानी 1994 में जेफ बेजोस ने अमेजन की शुरुआत की। अमेजन के पहले कॉन्ट्रैक्ट के लिए मैकेंजी ने ही डील की थी। गैराज से शुरू हुई अमेजन आज दुनिया की टॉप-3 कंपनियों में शामिल है। कंपनी का मार्केट कैप 893 अरब डॉलर है।
जेफ बेजोस के पूर्व टीवी एंकर लॉरेन सांचेज से रिश्ते
जेफ बेजोस और मैकेंजी के तलाक के ऐलान के एक दिन बाद अमेरिकी मैग्जीन द एनक्वाइरर ने खुलासा किया था कि बेजोस के तलाक लेने की वजह पूर्व टीवी एंकर लॉरेन सांचेज हैं। बेजोस और सांचेज रिलेशनशिप में हैं। मैग्जीन ने दोनों के निजी मैसेज और तस्वीरें भी सार्वजनिक किए। उसने बताया कि बेजोस सांचेज को अश्लील मैसेज और तस्वीरें भेजते हैं। बेजोस ने इसकी जांच करवाई कि उनके मैसेज लीक कैसे हुए। पिछले दिनों उनकी जांच टीम ने बताया कि बेजोस का फोन हैक हुआ था। उसमें सऊदी अरब का हाथ था।
मैकेंजी ने अपने हिस्से के वोटिंग राइट बेजोस को दिए
तलाक के लिए हुए एग्रीमेंट के मुताबिक मैकेंजी संयुक्त शेयरों में से 75% बेजोस को देने और 25% अपने पास रखने के लिए राजी हुईं। दोनों के पास अमेजन के 16% शेयर थे। उनमें से 4% अब मैकेंजी के पास हैं। हालांकि, मैकेंजी ने अपने हिस्से के शेयरों के वोटिंग राइट्स बेजोस को दिए हैं। बेजोस के अखबार वॉशिंगटन पोस्ट और स्पेस कंपनी ब्लू ऑरिजिन में भी उन्होंने कोई हिस्सेदारी नहीं मांगी है।
मैकेंजी अमेजन की तीसरी बड़ी शेयरहोल्डर
मैकेंजी के पास 4% शेयर जाने के बाद जेफ बेजोस के पास अमेजन के 12% शेयर रह गए हैं। वो अमेजन के सबसे बड़े शेयरधारक हैं। दूसरे नंबर पर इन्वेस्टमेंट ग्रुप वेनगार्ड है। मैकेंजी तीसरी सबसे बड़ी शेयरहोल्डर बन गई हैं।
मैकेंजी 50% शेयर लेतीं तो बेजोस दुनिया के सबसे बड़े अमीर नहीं रहते
जेफ बेजोस और मैकेंजी ने इस साल जनवरी में तलाक का ऐलान किया था। उस वक्त कयास लगाए गए कि मैकेंजी दुनिया की सबसे अमीर महिला बन सकती हैं। वॉशिंगटन के कानून के मुताबिक शादी के बाद अर्जित की गई संपत्ति तलाक के समय पति-पत्नी में बराबर बांटी जाती है। ऐसा होता तो जेफ बेजोस दुनिया के अमीरों की लिस्ट में पहले से फिसलकर चौथे नंबर पर आ जाते। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स में माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स (नेटवर्थ 102 अरब डॉलर) दूसरे नंबर पर हैं।
26 साल पहले जॉब इंटरव्यू में पहली बार मिले थे जेफ और मैकेंजी
मैकेंजी उपन्यासकार हैं और उन्होंने दि टेस्टिंग ऑफ लूथर अलब्राइट एवं ट्रैप्स सहित कई किताबें लिखी हैं। साल 1992 में जॉब इंटरव्यू के दौरान जेफ बेजोस से उनकी पहली मुलाकात हुई थी। वो हेज फंड कंपनी डी ई शॉ में इंटरव्यू के लिए गई थीं। जेफ ने ही उनका इंटरव्यू लिया था।
अमेजन की कामयाबी में मैकेंजी की अहम भूमिका
साल 1993 में जेफ और मैकेंजी की शादी हुई थी। उस वक्त दोनों हेज फंड कंपनी डी ई शॉ में काम करते थे। शादी के अगले साल यानी 1994 में जेफ बेजोस ने अमेजन की शुरुआत की। अमेजन के पहले कॉन्ट्रैक्ट के लिए मैकेंजी ने ही डील की थी। गैराज से शुरू हुई अमेजन आज दुनिया की टॉप-3 कंपनियों में शामिल है। कंपनी का मार्केट कैप 893 अरब डॉलर है।
जेफ बेजोस के पूर्व टीवी एंकर लॉरेन सांचेज से रिश्ते
जेफ बेजोस और मैकेंजी के तलाक के ऐलान के एक दिन बाद अमेरिकी मैग्जीन द एनक्वाइरर ने खुलासा किया था कि बेजोस के तलाक लेने की वजह पूर्व टीवी एंकर लॉरेन सांचेज हैं। बेजोस और सांचेज रिलेशनशिप में हैं। मैग्जीन ने दोनों के निजी मैसेज और तस्वीरें भी सार्वजनिक किए। उसने बताया कि बेजोस सांचेज को अश्लील मैसेज और तस्वीरें भेजते हैं। बेजोस ने इसकी जांच करवाई कि उनके मैसेज लीक कैसे हुए। पिछले दिनों उनकी जांच टीम ने बताया कि बेजोस का फोन हैक हुआ था। उसमें सऊदी अरब का हाथ था।
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