सीताराम केसरी को कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटाए जाने के 20 साल बाद अचानक इस बारे में कहा और लिखा जा रहा है.
छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रचार के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महासमंद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "देश को पता है. सीताराम केसरी, दलित, पीड़ित, शोषित समाज से आए हुए व्यक्ति को पार्टी के अध्यक्ष पद से कैसे हटाया गया. कैसे बाथरूम में बंद कर दिया गया था. कैसे दरवाज़े से हटा कर, उठा कर फ़ुटपाथ पर फेंक दिया गया था. और मैडम सोनिया जी को बैठा दिया गया था. ये इतिहास हिंदुस्तान भली-भांति जानता है. उनको मजबूरी में बनाया था, उसको भी वो दो साल झेल नहीं पाए."
इन तथ्यों को जांचने के लिए और सबसे पुरानी पार्टी में उस वक्त चल रही हलचल को समझने के लिए हमें दोबारा इस मामले को याद करना होगा.
दरअसल, केसरी दलित थे ही नहीं और ना ही वो उस वक्त पार्टी के भीतर बेहद लोकप्रिय थे जब 14 मार्च 1998 में असंवैधानिक तख्तापलट की साजिश रची गई.
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जितेंद्र प्रसाद, के करुणाकरन, शरद पवार, अर्जुन सिंह और कांग्रेस वर्किंग समिति के लगभग सभी सदस्य केसरी से निजात पाना चाहते थे और उन्हें हटाने में इन सभी की भागीदारी रही.
हालांकि ये भी सच है कि केसरी और उनके समर्थकों ने सोनिया को पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाने से रोकने की हर तरह की कोशिश की थी.
केसरी के एक करीबी ने एक प्रतिष्ठित अख़बार के कॉलम में लिखा था कि सोनिया को इस तरह की ओछी राजनीति करने की बजाय इटली वापस लौट जाना चाहिए और एक अच्छी नानी मां की भूमिका निभानी चाहिए.
सितंबर 1996 से मार्च 1998 तक पार्टी अध्यक्ष रहे केसरी के साथ कई समस्याएं थीं. दक्षिण और उत्तर-पूर्व के नेताओं को उनसे बातचीत करने में समस्या पेश आती थी क्योंकि वो अंग्रेज़ी नहीं जानते थे. उत्तर भारत के कांग्रेस के उच्च जाति के कई नेताओं ने उन्हें अपना नेता माना ही नहीं, क्योंकि केसरी पिछड़ी जाति के थे.
केसरी भी कांग्रेस के उत्तर भारत के ब्राह्मण और ठाकुरों को पसंद नहीं करते थे. ये बात भी जगज़ाहिर थी.
इसके अलावा केसरी लालू प्रसाद यादव, कांशी राम और मुलायम सिंह यादव जैसे नेताओं के साथ महागठबंधन करना चाहते थे, जबकि कांग्रेस उस वक्त भी ख़ुद को पूरे देश का नेतृत्व करने वाली पार्टी मानती थी और गठबंधन में उसकी ख़ास रुचि नहीं थी.
लोकसभा चुनाव हारने के बाद अपने अस्तित्व को बचाने की कोशिश कर रहे ऊंची जाति के कई कांग्रेसी नेताओं को केसरी के विचार और हतोत्साहित कर रहे थे.
Monday, November 19, 2018
Sunday, November 18, 2018
ऐड गुरु और थिएटर आर्टिस्ट एलेक पद्मसी का निधन
एलेक पद्मसी भारतीय विज्ञापन जगत के उन चुनिंदा लोगों में शुमार थे जिन्होंने भारतीय विज्ञापनों की दुनिया को एक वैश्विक पहचान दी.
उनके सबसे यादगार विज्ञापनों में 'हमारा बजाज' और 'लिरिल गर्ल' जैसे विज्ञापन शामिल हैं जो आज भी लोगों के ज़हन में अपनी जगह बनाए हुए हैं.
आज़ाद सोच और जवां अंदाज़ के साथ ज़िंदगी जीने वाले एलेक पद्मसी ने 90 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह दिया.
सोशल मीडिया पर उनकी मौत की ख़बर आने के बाद मनोरंजन क्षेत्र से लेकर राजनीति और पत्रकारिता जगत के लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देना शुरू कर दिया है.
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने पद्मसी को याद करते हुए लिखा है, "हमारे विज्ञापन जगत की सबसे महान व्यक्ति, क्रिएटिव गुरू और थिएटर पर्सनालिटी एलेक पद्मसी की मौत के बारे में जानकर बेहद दुख हुआ. मेरी संवेदना उनके परिवार, दोस्तों और सहयोगियों के साथ है."
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अभिनेता बोमन ईरानी ने भी पद्मसी को अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा है, "ए़ड गुरु और थिएटर की दुनिया के महारथी पद्मसी की मौत की ख़बर सुनकर बेहद दुखी हूं. थिएटर की दुनिया में मुझे पहला ब्रेक उन्होंने ही दिया. उन जैसा अब कोई नहीं होगा."
कौन थे एलेक पद्मसी?
साल 1928 में एक गुजराती परिवार में पैदा होने वाले एलेक पद्मसी को विज्ञापन की दुनिया का पितामह कहा जाता था.
'एडवरटाइज़िंग मैन ऑफ़ द सेंचुरी' कहे जाने वाले एलेक पद्मसी को साल 1999 में पद्मश्री सम्मान से भी नवाज़ा गया.
एडवरटाइज़िंग क्षेत्र से जुड़े लोग बताते हैं कि अस्सी के दशक में एडवरटाइज़िंग क्षेत्र के लोगों के बीच एक चुटकुला प्रचलित था.
कहा जाता था कि अगर आपको गॉड तक पहुंचना है तो पोप के पास जाना ही होगा.
इस जोक के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है.
कहा जाता है कि अस्सी के दशक में एलेक को 'गॉड' कहा जाता था और उनकी एक सेक्रेटरी भी हुआ करती थीं जिनका उपनाम पोप होता था.
विज्ञापन जगत में एक लंबा समय गुजारने वाले एलेक पद्मसी कहते थे कि आइकॉनिक ब्रांड्स वो होते हैं जो कंपनियों के ख़त्म होने के बाद भी लोगों के ज़हन में बने रहते हैं.
एलेक पद्मसी ऐसे ही 100 ब्रांड्स को अस्तित्व में लेकर आए.
चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.
उन्होंने अपंग बच्चों पर एक शॉर्ट फ़िल्म 'स्टोरी ऑफ़ होप' भी बनाई जिसे विज्ञापन की दुनिया के ऑस्कर अवॉर्ड कहे जाने वाले इंटरनेशनल स्लियो हॉल ऑफ़ फेम में शामिल किया गया.
विज्ञापन की दुनिया में ये सम्मान पाने वाले एलेक पद्मसी अकेले भारतीय थे.
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दो ज़िंदगियां जीने वाले पद्मसी
एलेक पद्मसी को विज्ञापन की दुनिया का बेताज बादशाह कहा जाता है.
लेकिन उन्होंने थिएटर और सिनेमा की दुनिया में भी ऐसा काम किया जिससे लोग हैरत में पड़ जाते हैं.
उनके सबसे यादगार विज्ञापनों में 'हमारा बजाज' और 'लिरिल गर्ल' जैसे विज्ञापन शामिल हैं जो आज भी लोगों के ज़हन में अपनी जगह बनाए हुए हैं.
आज़ाद सोच और जवां अंदाज़ के साथ ज़िंदगी जीने वाले एलेक पद्मसी ने 90 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह दिया.
सोशल मीडिया पर उनकी मौत की ख़बर आने के बाद मनोरंजन क्षेत्र से लेकर राजनीति और पत्रकारिता जगत के लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देना शुरू कर दिया है.
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने पद्मसी को याद करते हुए लिखा है, "हमारे विज्ञापन जगत की सबसे महान व्यक्ति, क्रिएटिव गुरू और थिएटर पर्सनालिटी एलेक पद्मसी की मौत के बारे में जानकर बेहद दुख हुआ. मेरी संवेदना उनके परिवार, दोस्तों और सहयोगियों के साथ है."
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अभिनेता बोमन ईरानी ने भी पद्मसी को अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा है, "ए़ड गुरु और थिएटर की दुनिया के महारथी पद्मसी की मौत की ख़बर सुनकर बेहद दुखी हूं. थिएटर की दुनिया में मुझे पहला ब्रेक उन्होंने ही दिया. उन जैसा अब कोई नहीं होगा."
कौन थे एलेक पद्मसी?
साल 1928 में एक गुजराती परिवार में पैदा होने वाले एलेक पद्मसी को विज्ञापन की दुनिया का पितामह कहा जाता था.
'एडवरटाइज़िंग मैन ऑफ़ द सेंचुरी' कहे जाने वाले एलेक पद्मसी को साल 1999 में पद्मश्री सम्मान से भी नवाज़ा गया.
एडवरटाइज़िंग क्षेत्र से जुड़े लोग बताते हैं कि अस्सी के दशक में एडवरटाइज़िंग क्षेत्र के लोगों के बीच एक चुटकुला प्रचलित था.
कहा जाता था कि अगर आपको गॉड तक पहुंचना है तो पोप के पास जाना ही होगा.
इस जोक के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है.
कहा जाता है कि अस्सी के दशक में एलेक को 'गॉड' कहा जाता था और उनकी एक सेक्रेटरी भी हुआ करती थीं जिनका उपनाम पोप होता था.
विज्ञापन जगत में एक लंबा समय गुजारने वाले एलेक पद्मसी कहते थे कि आइकॉनिक ब्रांड्स वो होते हैं जो कंपनियों के ख़त्म होने के बाद भी लोगों के ज़हन में बने रहते हैं.
एलेक पद्मसी ऐसे ही 100 ब्रांड्स को अस्तित्व में लेकर आए.
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उन्होंने अपंग बच्चों पर एक शॉर्ट फ़िल्म 'स्टोरी ऑफ़ होप' भी बनाई जिसे विज्ञापन की दुनिया के ऑस्कर अवॉर्ड कहे जाने वाले इंटरनेशनल स्लियो हॉल ऑफ़ फेम में शामिल किया गया.
विज्ञापन की दुनिया में ये सम्मान पाने वाले एलेक पद्मसी अकेले भारतीय थे.
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दो ज़िंदगियां जीने वाले पद्मसी
एलेक पद्मसी को विज्ञापन की दुनिया का बेताज बादशाह कहा जाता है.
लेकिन उन्होंने थिएटर और सिनेमा की दुनिया में भी ऐसा काम किया जिससे लोग हैरत में पड़ जाते हैं.
Friday, November 16, 2018
इतिहास की सबसे बड़ी आग से 63 की मौत, दोबारा बसाना पड़ेगा एक पूरा शहर
अमेरिका के कैलिफोर्निया के जंगलों में भड़की आग पिछले एक हफ्ते में 63 लोगों की जान ले चुकी है। राज्य भर में अब तक करीब 12 हजार इमारतें खाक हुई हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 631 लोग लापता हैं। आग से हुए नुकसान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य का पैराडाइज शहर पूरी तरह तबाह हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि शहर को दोबारा बसाने में कई साल लग सकते हैं।
तेज हवाओं की वजह से नए इलाकों में फैल रही आग
पूरे राज्य में आग से निपटने के लिए 9400 दमकलकर्मी लगाए गए हैं। हालांकि, तेज हवाओं की वजह से आग तेजी से नए इलाकों में फैल रही है। इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी के प्रमुख ब्रॉक लॉन्ग ने बताया कि पैराडाइज के लिए यह सबसे खराब आपदा थी।
लापता लोगों को ढूंढने के लिए फोरेंसिक टीम सेना और खोजी कुत्तों की मदद ले रही है। सर्च ऑपरेशन में भी कई हफ्तों का समय लग सकता है। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प शनिवार को प्रभावित इलाकों का दौरा कर सकते हैं।
तीन दिन में लापता लोगों की संख्या दो गुनी
दो दिन पहले जारी आधिकारिक लिस्ट में करीब 300 लोगों के लापता होने की बात सामने आई थी। हालांकि, गुरुवार को नई लिस्ट में 631 लोग लापता बताए गए। बट काउंटी के शेरिफ कोरी होने ने बताया कि इसकी वजह अधिकारियों की ओर से की जा रही सघन जांच है।
8 नवंबर को आग शुरू होने के बाद से जितने लोगों ने इमरजेंसी सर्विस को फोन लगाया था उनकी जांच के बाद ही नई लिस्ट जारी की गई। होने ने कहा कि आने वाले दिनों में लापताओं की संख्या और बढ़ सकती है।
दमकलकर्मियों ने 40% आग पर काबू पाया
कैलिफोर्निया के दमकल विभाग के मुताबिक, अब तक 40% आग पर काबू पा लिया गया है। अफसरों का कहना है कि ऑपरेशन तेजी से चलाने के बावजूद महीने के अंत तक इस पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सकता। आग की वजह से करीब 1,45,000 एकड़ का इलाका बर्बाद हो चुका है।
गैस और बिजली कंपनियों के खिलाफ लोगों ने दायर की याचिका
अधिकारियों ने आग लगने की वजहों का कोई खुलासा नहीं किया। कुछ लोगों ने कैलिफोेर्निया की पैसिफिक गैस और इलेक्ट्रिक कंपनी के खिलाफ याचिका दायर कीहै। पैसिफिक के स्टॉक अब तक 31% तक गिर चुके हैं। इसकी वजह से बाजार को 16 अरब डॉलर तक का नुकसान हुआ है। सोमवार को राज्य की पब्लिक यूटिलिटी कमीशन ने दो बिजली कंपनियों पीजी एंड ई और सदर्न कैलिफोर्निया एडिसन के खिलाफ जांच का ऐलान किया था।
तेज हवाओं की वजह से नए इलाकों में फैल रही आग
पूरे राज्य में आग से निपटने के लिए 9400 दमकलकर्मी लगाए गए हैं। हालांकि, तेज हवाओं की वजह से आग तेजी से नए इलाकों में फैल रही है। इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी के प्रमुख ब्रॉक लॉन्ग ने बताया कि पैराडाइज के लिए यह सबसे खराब आपदा थी।
लापता लोगों को ढूंढने के लिए फोरेंसिक टीम सेना और खोजी कुत्तों की मदद ले रही है। सर्च ऑपरेशन में भी कई हफ्तों का समय लग सकता है। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प शनिवार को प्रभावित इलाकों का दौरा कर सकते हैं।
तीन दिन में लापता लोगों की संख्या दो गुनी
दो दिन पहले जारी आधिकारिक लिस्ट में करीब 300 लोगों के लापता होने की बात सामने आई थी। हालांकि, गुरुवार को नई लिस्ट में 631 लोग लापता बताए गए। बट काउंटी के शेरिफ कोरी होने ने बताया कि इसकी वजह अधिकारियों की ओर से की जा रही सघन जांच है।
8 नवंबर को आग शुरू होने के बाद से जितने लोगों ने इमरजेंसी सर्विस को फोन लगाया था उनकी जांच के बाद ही नई लिस्ट जारी की गई। होने ने कहा कि आने वाले दिनों में लापताओं की संख्या और बढ़ सकती है।
दमकलकर्मियों ने 40% आग पर काबू पाया
कैलिफोर्निया के दमकल विभाग के मुताबिक, अब तक 40% आग पर काबू पा लिया गया है। अफसरों का कहना है कि ऑपरेशन तेजी से चलाने के बावजूद महीने के अंत तक इस पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सकता। आग की वजह से करीब 1,45,000 एकड़ का इलाका बर्बाद हो चुका है।
गैस और बिजली कंपनियों के खिलाफ लोगों ने दायर की याचिका
अधिकारियों ने आग लगने की वजहों का कोई खुलासा नहीं किया। कुछ लोगों ने कैलिफोेर्निया की पैसिफिक गैस और इलेक्ट्रिक कंपनी के खिलाफ याचिका दायर कीहै। पैसिफिक के स्टॉक अब तक 31% तक गिर चुके हैं। इसकी वजह से बाजार को 16 अरब डॉलर तक का नुकसान हुआ है। सोमवार को राज्य की पब्लिक यूटिलिटी कमीशन ने दो बिजली कंपनियों पीजी एंड ई और सदर्न कैलिफोर्निया एडिसन के खिलाफ जांच का ऐलान किया था।
Sunday, November 11, 2018
मतदान से एक दिन पहले संदिग्ध माओवादियों के छह धमाके, एक जवान की मौत
छत्तीसगढ़ के कांकेर में विधानसभा चुनाव के लिए होने वाले मतदान से एक दिन पहले संदिग्ध माओवादियों ने लगातार छह आईईडी विस्फोट किए, जिसमें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक सब-इंस्पेक्टर की मौत हो गई.
इन विस्फोटों में ज़िला पुलिस बल के एक जवान के घायल होने की भी ख़बर है.
दूसरी ओर बीजापुर ज़िले में पुलिस ने मुठभेड़ में एक कथित माओवादी के मारे जाने का दावा किया है.
बीएसएफ़ की 35वीं बटालियन के थे जवान
नक्सल मामलों के डीआईजी सुंदरराज पी के अनुसार,"सीमा सुरक्षा बल की एक टुकड़ी एरिया डॉमिनेशन के लिए निकली थी, जहां माओवादियों द्वारा किए गये सीरियल ब्लास्ट की चपेट में आकर एक सब इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह की मौत हो गई."
पुलिस के अनुसार सीमा सुरक्षा बल की 35वीं बटालियन के जवान कोइलीबेड़ा थाना क्षेत्र के उदनपुर और गट्टाकाल के बीच ऑपरेशन के लिए निकले थे, जहां वे पहले से ही सड़क पर लगाए गए विस्फोटकों की चपेट में आ गए.
इधर एक अन्य घटना में बीजापुर के बेदरे में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में एक कथित माओवादी के मारे जाने का दावा किया है. पुलिस के अनुसार मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने एक राइफल के अलावा दूसरी संदिग्ध चीज़ें बरामद की हैं.
पुलिस ने सुकमा ज़िले के कन्हइगुड़ा में भी आठ किलो से अधिक का इंप्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस बरामद किया है.
लगातार हिंसक घटनाएं
छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव क़रीब आने के साथ माओवादी हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं. बीते पंद्रह दिनों में माओवादियों की हिंसा में सुरक्षाबलों के 8 जवानों समेत कुल 16 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. इस दौरान सुरक्षाबलों ने 300 से भी अधिक जगहों से बारूदी सुरंग या आईईडी बरामद की है.
हालांकि शनिवार को ही छत्तीसगढ़ के लिए पार्टी का संकल्प पत्र जारी करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दावा किया था कि रमन सिंह सरकार ने प्रदेश को 'नक्सलवाद से लगभग मुक्त' कर दिया है.
छत्तीसगढ़ में विधानसभा की 90 में से 18 सीटों पर सोमवार को मतदान होने हैं. बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, सुकमा, बीजापुर और राजनांदगांव ज़िले की 18 सीटों में से अधिकांश मतदान केंद्र माओवादी हिंसा के कारण संवेदनशील या अति संवेदनशील घोषित किए गए हैं. बड़ी संख्या में संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट कर दिया गया है.
31 लाख से अधिक मतदाताओं वाली इन 18 सीटों पर सुरक्षाबलों के लगभग डेढ़ लाख जवान तैनात किए गए हैं.
माओवादी हिंसा को ध्यान में रखते हुए मोहला-मानपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, केशकाल, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोंटा ऐसे क्षेत्र हैं, जहां मतदान के लिए सुबह 7 बजे से दोपहर 3 तीन बजे तक का समय निर्धारित किया गया है.
इन विस्फोटों में ज़िला पुलिस बल के एक जवान के घायल होने की भी ख़बर है.
दूसरी ओर बीजापुर ज़िले में पुलिस ने मुठभेड़ में एक कथित माओवादी के मारे जाने का दावा किया है.
बीएसएफ़ की 35वीं बटालियन के थे जवान
नक्सल मामलों के डीआईजी सुंदरराज पी के अनुसार,"सीमा सुरक्षा बल की एक टुकड़ी एरिया डॉमिनेशन के लिए निकली थी, जहां माओवादियों द्वारा किए गये सीरियल ब्लास्ट की चपेट में आकर एक सब इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह की मौत हो गई."
पुलिस के अनुसार सीमा सुरक्षा बल की 35वीं बटालियन के जवान कोइलीबेड़ा थाना क्षेत्र के उदनपुर और गट्टाकाल के बीच ऑपरेशन के लिए निकले थे, जहां वे पहले से ही सड़क पर लगाए गए विस्फोटकों की चपेट में आ गए.
इधर एक अन्य घटना में बीजापुर के बेदरे में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में एक कथित माओवादी के मारे जाने का दावा किया है. पुलिस के अनुसार मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने एक राइफल के अलावा दूसरी संदिग्ध चीज़ें बरामद की हैं.
पुलिस ने सुकमा ज़िले के कन्हइगुड़ा में भी आठ किलो से अधिक का इंप्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस बरामद किया है.
लगातार हिंसक घटनाएं
छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव क़रीब आने के साथ माओवादी हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं. बीते पंद्रह दिनों में माओवादियों की हिंसा में सुरक्षाबलों के 8 जवानों समेत कुल 16 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. इस दौरान सुरक्षाबलों ने 300 से भी अधिक जगहों से बारूदी सुरंग या आईईडी बरामद की है.
हालांकि शनिवार को ही छत्तीसगढ़ के लिए पार्टी का संकल्प पत्र जारी करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दावा किया था कि रमन सिंह सरकार ने प्रदेश को 'नक्सलवाद से लगभग मुक्त' कर दिया है.
छत्तीसगढ़ में विधानसभा की 90 में से 18 सीटों पर सोमवार को मतदान होने हैं. बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, सुकमा, बीजापुर और राजनांदगांव ज़िले की 18 सीटों में से अधिकांश मतदान केंद्र माओवादी हिंसा के कारण संवेदनशील या अति संवेदनशील घोषित किए गए हैं. बड़ी संख्या में संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट कर दिया गया है.
31 लाख से अधिक मतदाताओं वाली इन 18 सीटों पर सुरक्षाबलों के लगभग डेढ़ लाख जवान तैनात किए गए हैं.
माओवादी हिंसा को ध्यान में रखते हुए मोहला-मानपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, केशकाल, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोंटा ऐसे क्षेत्र हैं, जहां मतदान के लिए सुबह 7 बजे से दोपहर 3 तीन बजे तक का समय निर्धारित किया गया है.
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