आतंकवाद का रास्ता छोड़कर सेना में शामिल होने वाले लांस नायक नजीर वानी को अशोक चक्र अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा. ये पहला मौका है जब आतंक की नापाक राह से लौटे किसी जवान को देश के इतने बड़े सम्मान से नवाजने का निर्णय लिया गया है.
नजीर वानी ने 2004 में आत्मसमर्पण किया था. इसके कुछ वक्त बाद ही नजीर ने भारतीय सेना ज्वॉइन कर ली थी. कभी सेना के खिलाफ लड़ने वाले इस बहादुर जवान ने आतंकवादियों से लड़ते हुए नवंबर, 2018 में अपनी जान वतन के नाम कुर्बान कर दी थी.
दरअसल, पिछले साल नवंबर में शोपियां में कुछ आतंकियों के छुपे होने की खबर पर सुरक्षाबलों की टीम उन्हें मौत के घाट उतारने पहुंची थी. इस दौरान 6 आतंकवादियों ने एक घर में शरण ली थी, जिसे जवानों ने चारों तरफ से घेर लिया था. आतंकियों पर प्रहार करते हुए नजीर वानी ने एक दहशतगर्द को मार गिराया था. जबकि जवाबी फायरिंग में वह खुद भी घायल हो गए थे.
आतंकियों की गोली से जख्मी होने के बावजूद नजीर वानी ने उस घर में छुपे आतंकियों को भागने नहीं दिया. लांस नायक नजीर आतंकियों के भाग निकलने के रास्ते पर डटे रहे और उन्होंने एक और आतंकी को मौत के घाट उतार दिया. हालांकि, इस ऑपरेशन में दहशतगर्दों की गोलियां का निशाना बने नजीर वानी भी शहीद हो गए.
नजीर वानी की इस बहादुरी के लिए उन्हें अशोक चक्र सम्मान देने का फैसला किया गया है. राष्ट्रपति सचिवालय की तरफ से बताया गया है कि नजीर वानी एक बेहतर सैनिक थे और उन्होंने हमेशा चुनौतीपूर्ण मिशन में साहस दिखाया. बता दें कि नजीर वानी की जांबाजी के लिए उन्हें दो बार सेना मेडल भी मिल चुका है.
नजीर वानी कुलगाम के चेकी अश्मूजी गांव के रहने वाले थे. नजीर के परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं. साल 2004 में नजीर वानी ने टेरिटोरियल आर्मी से सेना में अपनी सेवा देनी शुरू की थी. 2007 में उन्हें पहला सेना मेडल और 2017 में दूसरा सेना मेडल दिया गया.
सिलसिला रुकने वाला नहीं है.
"इस तरह के विज्ञापनों की शुरुआत भर हुई है. शायद एक समय वह भी आएगा जब ऐसे विज्ञापन बहुतायत में दिखेंगे, लेकिन निकट भविष्य में ऐसा होने वाला नहीं है."
मल्होत्रा कहती हैं, "लोग अब उतने विज्ञापन नहीं देखते जितना पहले देखा करते थे. इसलिए आपको कुछ ऐसा कहने या करने की ज़रूरत होती है जो लोगों का ध्यान खींचे."
विज्ञापनों को बढ़ाने में सोशल मीडिया का भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण हो गई है.
मल्होत्रा का कहना है कि जिलेट ने हैशटैग का इस्तेमाल करके संकेत दिया कि वह इस मुद्दे पर ऑनलाइन बहस जारी रखना चाहती है.
सैद बिज़नेस स्कूल के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी सेंटर फ़ॉर कॉरपोरेट रीप्यूटेशन के डायरेक्टर रूपर्ट यंगर को लगता है कि आने वाले दिनों में इस तरह के विज्ञापन आम हो जाएंगे.
"नई नौकरियों में आ रहे युवा नियोक्ता चुनते समय सामाजिक उद्देश्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता देखते हैं."
यंगर का कहना है कि पेटागोनिया जैसी कंपनियां जो अपने सामाजिक उद्देश्यों को लेकर स्पष्ट हैं, बहुत कुछ हासिल कर सकती हैं.
प्रचार कंपनी इडेलमैन के 2018 के एक अध्ययन से पता चला कि दुनिया भर में दो-तिहाई उपभोक्ता अपने सामाजिक मूल्यों को ध्यान में रखकर ख़रीदारी करते हैं.
पिछले साल के मुक़ाबले यह आंकड़ा औसत रूप से 13 फीसदी बढ़ा. ब्रिटेन में इसमें 20 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई.
यंगर कहते हैं कि जैसे-जैसे सामाजिक मुद्दों वाले संदेश आम हो रहे हैं, ब्रांड उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए अलग-अलग तरकीबें अपनाएंगे.
"कुछ ब्रांड सोशल मीडिया पर भरोसा करेंगे तो कुछ की रणनीति दूसरी तरह से पहुंच बढ़ाने की होगी. कुछ ब्रांड आंतरिक संचार और समूह-स्तर के बयानों और प्रतिबद्धताओं पर ध्यान देंगे."
"सवाल है कि यदि सामाजिक संदेशों वाले विज्ञापन आम हो जाएंगे तो क्या वे प्रभावी रहेंगे? ये तो संभव नहीं है कि हम हर संदेश पर उछल पड़ें. ये बेहद उबाऊ और थकाऊ होगा."
"ये संवेदनाओं को कम कर देगा. ठीक उसी तरह जैसे अब लोग बैनर पर ध्यान नहीं देते. इसीलिए वेबसाइटों पर बैनर वाले विज्ञापन ग़ायब हो रहे हैं."
Wednesday, January 23, 2019
Wednesday, January 16, 2019
कितने विधायक साथ, कितने बागी? गिनती के लिए कर्नाटक कांग्रेस ने बुलाई बैठक
कर्नाटक के राजनीतिक गलियारे में सियासी उठापटक जारी है. मंगलवार देर रात दो विधायकों ने कर्नाटक सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है. इस बीच भाजपा का कहना है कि कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन की सरकार दो दिन में गिर जाएगी. बता दें कि दो विधायकों एच नागेश (निर्दलीय) और आर शंकर (केपीजेपी) ने कर्नाटक के राज्यपाल वाजूभाई वाला को पत्र लिखकर अपना समर्थन वापस लेने की बात कही. इन विधायकों द्वारा राज्यपाल को भेजी गई चिट्ठी ने गहमा-गहमी बढ़ा दी है.
हालांकि, 7 महीने पुरानी सरकार के लड़खड़ाने की बातों के बीच भी प्रदेश सरकार चिंतामुक्त है, क्योंकि इन विधायकों के सरकार से बाहर हो जाने के बाद भी कर्नाटक सरकार को कोई खतरा नहीं है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी सरकार स्थिर है और वह पूरी तरह निश्चिंत हैं. उन्होंने कहा, 'मुझे आपनी ताकत का अंदाजा है. कर्नाटक सरकार स्थिर है. दो विधायकों के समर्थन की घोषणा से क्या होगा?' सियासी अटकलों और बयानों के बीच मंगलवार को कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर, डीके शिवकुमार व अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की. जिसके बाद जेडीएस प्रमुख एचडी देवेगौड़ा ने भाजपा पर कर्नाटक सरकार के विधायकों को खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया.
> कांग्रेस पार्टी ने 18 जनवरी को बेंगलुरु में विधायकों की बैठक बुलाई है. शुक्रवार को 3.30 बजे होने वाली इस बैठक के बाद कांग्रेस अपने विधायकों की गिनती करेगी कि कितने विधायक उनके साथ हैं.
> बुधवार की सुबह मुख्यमंत्री डी कुमारस्वामी ने कहा कि कांग्रेस विधायक (मुंबई में होटल में मौजूद कांग्रेस विधायक) पहुंच से दूर हैं. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस विधायक मीडिया की पहुंच से दूर हैं, मेरी पहुंच से नहीं. मैं सभी से संपर्क में हूं और सभी बात कर रहा हूं. सभी वापस लौट जाएंगे. कर्नाटक में गठबंधन को कोई खतरा नहीं है.'
> सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने ITC होटल के चारो तरफ बैरिकेडिंग की, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ता बैरिकेडिंग के सामने ही बैठ गए हैं.
> सियासी घमासान के बीच ग्रुरुग्राम के ITC होटल में भारतीय जनता पार्टी के 104 विधायक रुके हुए हैं. वहीं होटल के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं.
> इस बीच कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि राज्य में कांग्रेस-जेडीएस सरकार की अंदरूनी कलह के कारण खुद ही गिर जाएगी. इधर, महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री राम शिंदे ने कहा कि कर्नाटक में गठबंधन की सरकार दो दिन में गिर जाएगी. उन्होंने कहा, 'लोगों के जनादेश की अनदेखी नहीं की जा सकती. कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा को सर्वाधिक मत मिले थे लेकिन कांग्रेस की राजनीति ने हमें सत्ता से दूर कर दिया. ऐसी तिकड़म काम नहीं करती.' वहीं, लोकसभा में भाजपा सांसद प्रताप सिन्हा ने कहा, 'येदियुरप्पा को अगले मुख्यमंत्री के रूप में देखना हमारी इच्छा है. 104 सीटें जीतने के बाद हम खामोश कैसे बैठ सकते हैं.'
> जानकारी के मुताबिक कांग्रेस-जीडीएस द्वारा खरीद फरोख्त की आशंका को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपने 104 विधायकों को हरियाणा के एक रिजॉर्ट में ठहराया है. बताया जा रहा है कि इन विधायकों के साथ कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीएस येद्दयुरप्पा, पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार और शोभा करंदलाजे भी शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक सरकार से समर्थन वापस लेने वाले दोनों विधायक प्रदेश कैबिनेट में जगह नहीं मिल पाने से नाराज थे.
क्या बिखर सकती है गठबंधन की सरकार?
कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक के प्रभारी के. सी. वेणुगोपाल ने राज्य के गठबंधन सहयोगियों के बीच तनावपूर्ण संबंधों की अटकलों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार हर हाल में चलेगी. यह 5 साल पूरे करेगी. कुछ नहीं होगा. हमारे विधायक मजबूत और एकजुट हैं. भाजपा को यह करारा जवाब होगा.' उन्होंने कहा, 'हम बिल्कुल एकजुट हैं.' साथ ही उन्होंने कहा कि जल्द ही भाजपा के अनैतिक कार्यों का भंडाफोड़ होगा. कांग्रेस ने कहा कि भाजपा की डर्टी ट्रिक्स से सरकार बनती तो विधानसभा चुनावों जरूरत ही नहीं होती.
हालांकि, 7 महीने पुरानी सरकार के लड़खड़ाने की बातों के बीच भी प्रदेश सरकार चिंतामुक्त है, क्योंकि इन विधायकों के सरकार से बाहर हो जाने के बाद भी कर्नाटक सरकार को कोई खतरा नहीं है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी सरकार स्थिर है और वह पूरी तरह निश्चिंत हैं. उन्होंने कहा, 'मुझे आपनी ताकत का अंदाजा है. कर्नाटक सरकार स्थिर है. दो विधायकों के समर्थन की घोषणा से क्या होगा?' सियासी अटकलों और बयानों के बीच मंगलवार को कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर, डीके शिवकुमार व अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की. जिसके बाद जेडीएस प्रमुख एचडी देवेगौड़ा ने भाजपा पर कर्नाटक सरकार के विधायकों को खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया.
> कांग्रेस पार्टी ने 18 जनवरी को बेंगलुरु में विधायकों की बैठक बुलाई है. शुक्रवार को 3.30 बजे होने वाली इस बैठक के बाद कांग्रेस अपने विधायकों की गिनती करेगी कि कितने विधायक उनके साथ हैं.
> बुधवार की सुबह मुख्यमंत्री डी कुमारस्वामी ने कहा कि कांग्रेस विधायक (मुंबई में होटल में मौजूद कांग्रेस विधायक) पहुंच से दूर हैं. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस विधायक मीडिया की पहुंच से दूर हैं, मेरी पहुंच से नहीं. मैं सभी से संपर्क में हूं और सभी बात कर रहा हूं. सभी वापस लौट जाएंगे. कर्नाटक में गठबंधन को कोई खतरा नहीं है.'
> सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने ITC होटल के चारो तरफ बैरिकेडिंग की, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ता बैरिकेडिंग के सामने ही बैठ गए हैं.
> सियासी घमासान के बीच ग्रुरुग्राम के ITC होटल में भारतीय जनता पार्टी के 104 विधायक रुके हुए हैं. वहीं होटल के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं.
> इस बीच कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि राज्य में कांग्रेस-जेडीएस सरकार की अंदरूनी कलह के कारण खुद ही गिर जाएगी. इधर, महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री राम शिंदे ने कहा कि कर्नाटक में गठबंधन की सरकार दो दिन में गिर जाएगी. उन्होंने कहा, 'लोगों के जनादेश की अनदेखी नहीं की जा सकती. कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा को सर्वाधिक मत मिले थे लेकिन कांग्रेस की राजनीति ने हमें सत्ता से दूर कर दिया. ऐसी तिकड़म काम नहीं करती.' वहीं, लोकसभा में भाजपा सांसद प्रताप सिन्हा ने कहा, 'येदियुरप्पा को अगले मुख्यमंत्री के रूप में देखना हमारी इच्छा है. 104 सीटें जीतने के बाद हम खामोश कैसे बैठ सकते हैं.'
> जानकारी के मुताबिक कांग्रेस-जीडीएस द्वारा खरीद फरोख्त की आशंका को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपने 104 विधायकों को हरियाणा के एक रिजॉर्ट में ठहराया है. बताया जा रहा है कि इन विधायकों के साथ कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीएस येद्दयुरप्पा, पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार और शोभा करंदलाजे भी शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक सरकार से समर्थन वापस लेने वाले दोनों विधायक प्रदेश कैबिनेट में जगह नहीं मिल पाने से नाराज थे.
क्या बिखर सकती है गठबंधन की सरकार?
कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक के प्रभारी के. सी. वेणुगोपाल ने राज्य के गठबंधन सहयोगियों के बीच तनावपूर्ण संबंधों की अटकलों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार हर हाल में चलेगी. यह 5 साल पूरे करेगी. कुछ नहीं होगा. हमारे विधायक मजबूत और एकजुट हैं. भाजपा को यह करारा जवाब होगा.' उन्होंने कहा, 'हम बिल्कुल एकजुट हैं.' साथ ही उन्होंने कहा कि जल्द ही भाजपा के अनैतिक कार्यों का भंडाफोड़ होगा. कांग्रेस ने कहा कि भाजपा की डर्टी ट्रिक्स से सरकार बनती तो विधानसभा चुनावों जरूरत ही नहीं होती.
Monday, January 14, 2019
रेपिस्ट से किलर बना बाबा, अब मुश्किल है जेल से बाहर आना
बलात्कारी भी वो. कातिल भी वो. ढोंग का सामान भी वो. धर्म की दुकान भी वो. छल, कपट, लालच, धोखा, हवस और आस्था की अस्मत से खेलने वाला शैतान भी वो. मगर अब ना उसके चेहरे पर बाबा का मुखौटा है और ना ही इर्द-गिर्द उन भक्तों की भीड़ जिनकी मासूमियत को उसने छला था. अब बस कुछ है तो जेल की पथरीली फर्श और जिस्म पर कैदी नंबर 1997 की वर्दी. गुरमीत राम-रहीम इंसां को एक बार फिर अदालत ने इंसान मानने से इंकार करते हुए क़ातिल क़रार दे दिया है. बलात्कारी तो खैर वो पहले ही से था. तो पेश है एक बाबा के बलात्कारी से लेकर कातिल बनने तक की पूरी कहानी.
अपने डेरे में साध्वियों से बलात्कार के मामले में जेल की चक्की पीस रहे हीरो हीरालाल बाबा राम रहीम को अपने किए का एक और इनाम मिला है. अब बाबा बलात्कारी के साथ साथ खूनी भी हो गए हैं. ये वही हीरो हीरालाल बाबा हैं जो कभी खुद को मल्टी टैलेंटेड बताते थे, तो कभी भगवान. अध्यात्म से लेकर फिल्मों तक हर हुनर में क्रांति ले आए थे. और फिल्मों में भी बाबा सिर्फ हीरो नहीं बने, बल्कि डायरेक्टर, संगीतकार, लेखक, गीतकार, सिनेमेटोग्राफर, ड्रेस डिज़ाइनर, यानी ऑल इन वन थे बाबा. हरफन मौला राम रहीम ने अपने हर एक फन और ढोंग से पैसों की ऐसी झड़ी लगाई की अपने इर्द-गिर्द एक पूरी मायावी दुनिया ही खड़ी कर ली.
डेरा प्रमुख शाह सतनाम सिंह ने सात साल के गुरमीत सिंह को जब राम रहीम का नाम देकर उसे अपना डेरा सौंपा था. तब उन्हें भी अंदाज़ा नहीं रहा होगा कि उनका ये शिष्य डेरे की पाकीज़गी को पाखण्ड के पेंट से पोत देगा. और उस पर अध्यात्म की नहीं अय्याशी की इबारत लिखेगा. बाबा राम रहीम हिंदुस्तान का पहला ऐसा बाबा बना जिसने बाबाओं को लेकर सबकी सोच बदल दी कि बाबा ऐसे कपड़े भी पहन सकते हैं. बाबा ऐसे गाड़ियां भी चला सकते हैं. बाबा ऐसे स्टंट भी कर सकते हैं. बाबा ऐसे नाच भी सकते हैं. बाबा ऐसे गा भी सकते हैं. बाबा ये भी कर सकते हैं. बाबा वो भी कर सकते हैं. यहां तक कि बाबा महल के अंदर गुफा भी बना सकते हैं. और उन गुफाओं में बाबा साध्वियों के विश्वास के मुंह पर कालिख भी पोत सकते हैं.
सिरसा के डेरे में बाबा गुरमीत राम रहीम की एक गुफा है, जहां वो साध्वियों को अपनी हवस का शिकार बनाया करता था. और आज जेल में वो अपने उन्हीं कुकर्मों की सज़ा भुगत रहा है. ये गुफा बाबा ने अपने डेरे में गुप्त रुप से कई बरसों से बना रथी थी. फिर कोई समझ नहीं पाया कि बाबा का तिलिस्म क्या था. वो गुफा में करता क्या था. असल में बाबा और उसकी हनी ने अपने इर्द-गिर्द इस रहस्यलोक का चक्रव्यूह रचा ही कुछ ऐसा था. जो बाहर से देखने में मामूली था मगर जैसे जैसे कोई अंदर आता जाता था, वो इस चक्रव्यूह में फंसता चला जाता. इसमें में वो भी फंसे जो सेवादार थे. वो भी जो वफादार थे. वो भी जो पढती थीं. वो भी जो पढ़ाती थीं. वो भी जो बीमार थे. वो भी जो तीमारदार थे. वो भी जो रिश्तेदार थे और वो भी जो जानकार थे.
कुल मिलाकर इस रहस्यलोक के चक्रव्यूह से दो ही लोग महफूज़ थे. एक वो जिसने इसे बनाया था. यानी बाबा गुरमीत राम रहीम. और दूसरी वो जो इसमें लोगों को फंसाती थी. यानी बाबा की हनीप्रीत. बाकी तमाम मोहरे थे. जिन्हें वो उंगलियों पर नचाते थे और वो इशारों पर नाचते थे. बाबा के रहस्यलोक का ये तो सिर्फ एक पहलू है. रंगीनमिज़ाजी के अलावा भी बाबा के कुकर्मों की फेहरिस्त बहुत लंबी है. जिस बाबा को एक जोड़ी कपड़े में उम्र गुज़ार देनी चाहिए उसकी रंग बिरंगी पोशाकें. सोने सा महल और महंगी महंगी गाडियां ये बिना बोले ही बता देंगी कि इस बाबा की नियत में खोट है.
बाबा का रहस्यलोक सिर्फ रंगीनियों और ऐशो-आराम से ही नहीं भरा हुआ था बल्कि उनके सेवादार बताते हैं कि इसकी दरो-दीवार में बेबस साध्वियों की चीखें दबी हुई हैं. इसे बेगुनाहों के खूनों से सिंचा गया है. मगर बाबा के रहस्यलोक में उसी का राज था. वही खुदा था. मगर वो भी जानता था कि जिस रास्ते पर वो चल रहा है. एक ना एक दिन उसका अंजाम बुरा होने वाला है और वही हुआ. दो बलात्कार के लिए बीस साल जेल पहली किश्त में मिली और अब कत्ल के लिए अगली किश्त का इंतजार है.
अपने डेरे में साध्वियों से बलात्कार के मामले में जेल की चक्की पीस रहे हीरो हीरालाल बाबा राम रहीम को अपने किए का एक और इनाम मिला है. अब बाबा बलात्कारी के साथ साथ खूनी भी हो गए हैं. ये वही हीरो हीरालाल बाबा हैं जो कभी खुद को मल्टी टैलेंटेड बताते थे, तो कभी भगवान. अध्यात्म से लेकर फिल्मों तक हर हुनर में क्रांति ले आए थे. और फिल्मों में भी बाबा सिर्फ हीरो नहीं बने, बल्कि डायरेक्टर, संगीतकार, लेखक, गीतकार, सिनेमेटोग्राफर, ड्रेस डिज़ाइनर, यानी ऑल इन वन थे बाबा. हरफन मौला राम रहीम ने अपने हर एक फन और ढोंग से पैसों की ऐसी झड़ी लगाई की अपने इर्द-गिर्द एक पूरी मायावी दुनिया ही खड़ी कर ली.
डेरा प्रमुख शाह सतनाम सिंह ने सात साल के गुरमीत सिंह को जब राम रहीम का नाम देकर उसे अपना डेरा सौंपा था. तब उन्हें भी अंदाज़ा नहीं रहा होगा कि उनका ये शिष्य डेरे की पाकीज़गी को पाखण्ड के पेंट से पोत देगा. और उस पर अध्यात्म की नहीं अय्याशी की इबारत लिखेगा. बाबा राम रहीम हिंदुस्तान का पहला ऐसा बाबा बना जिसने बाबाओं को लेकर सबकी सोच बदल दी कि बाबा ऐसे कपड़े भी पहन सकते हैं. बाबा ऐसे गाड़ियां भी चला सकते हैं. बाबा ऐसे स्टंट भी कर सकते हैं. बाबा ऐसे नाच भी सकते हैं. बाबा ऐसे गा भी सकते हैं. बाबा ये भी कर सकते हैं. बाबा वो भी कर सकते हैं. यहां तक कि बाबा महल के अंदर गुफा भी बना सकते हैं. और उन गुफाओं में बाबा साध्वियों के विश्वास के मुंह पर कालिख भी पोत सकते हैं.
सिरसा के डेरे में बाबा गुरमीत राम रहीम की एक गुफा है, जहां वो साध्वियों को अपनी हवस का शिकार बनाया करता था. और आज जेल में वो अपने उन्हीं कुकर्मों की सज़ा भुगत रहा है. ये गुफा बाबा ने अपने डेरे में गुप्त रुप से कई बरसों से बना रथी थी. फिर कोई समझ नहीं पाया कि बाबा का तिलिस्म क्या था. वो गुफा में करता क्या था. असल में बाबा और उसकी हनी ने अपने इर्द-गिर्द इस रहस्यलोक का चक्रव्यूह रचा ही कुछ ऐसा था. जो बाहर से देखने में मामूली था मगर जैसे जैसे कोई अंदर आता जाता था, वो इस चक्रव्यूह में फंसता चला जाता. इसमें में वो भी फंसे जो सेवादार थे. वो भी जो वफादार थे. वो भी जो पढती थीं. वो भी जो पढ़ाती थीं. वो भी जो बीमार थे. वो भी जो तीमारदार थे. वो भी जो रिश्तेदार थे और वो भी जो जानकार थे.
कुल मिलाकर इस रहस्यलोक के चक्रव्यूह से दो ही लोग महफूज़ थे. एक वो जिसने इसे बनाया था. यानी बाबा गुरमीत राम रहीम. और दूसरी वो जो इसमें लोगों को फंसाती थी. यानी बाबा की हनीप्रीत. बाकी तमाम मोहरे थे. जिन्हें वो उंगलियों पर नचाते थे और वो इशारों पर नाचते थे. बाबा के रहस्यलोक का ये तो सिर्फ एक पहलू है. रंगीनमिज़ाजी के अलावा भी बाबा के कुकर्मों की फेहरिस्त बहुत लंबी है. जिस बाबा को एक जोड़ी कपड़े में उम्र गुज़ार देनी चाहिए उसकी रंग बिरंगी पोशाकें. सोने सा महल और महंगी महंगी गाडियां ये बिना बोले ही बता देंगी कि इस बाबा की नियत में खोट है.
बाबा का रहस्यलोक सिर्फ रंगीनियों और ऐशो-आराम से ही नहीं भरा हुआ था बल्कि उनके सेवादार बताते हैं कि इसकी दरो-दीवार में बेबस साध्वियों की चीखें दबी हुई हैं. इसे बेगुनाहों के खूनों से सिंचा गया है. मगर बाबा के रहस्यलोक में उसी का राज था. वही खुदा था. मगर वो भी जानता था कि जिस रास्ते पर वो चल रहा है. एक ना एक दिन उसका अंजाम बुरा होने वाला है और वही हुआ. दो बलात्कार के लिए बीस साल जेल पहली किश्त में मिली और अब कत्ल के लिए अगली किश्त का इंतजार है.
Monday, January 7, 2019
बी चंद्रकला: सोशल मीडिया पर चहेती अधिकारी से एक 'भ्रष्ट' अधिकारी तक
सोशल मीडिया पर लाखों फ़ॉलोवर्स, मातहत अफ़सरों को लताड़ते वीडियो, सख़्त और ईमानदार अफ़सर की पिछले दस साल में हासिल की गई छवि एकाएक धूमिल हो जाएगी, ये शायद बी. चंद्रकला ने पहले कभी नहीं सोचा होगा.
हालांकि, इस तरह की 'रॉबिनहुड' टाइप और ईमानदार छवि के बावजूद उन पर कई तरह के आरोप पहले भी लगे और कार्यशैली की आलोचना भी हुई लेकिन राज्य सरकारों की वो इतनी चहेती थीं कि उन पर कभी आंच नहीं आई.
साल 2008 बैच की आईएएस अधिकारी भुक्या चंद्रकला मूल रूप से तेलंगाना के करीमनगर की रहने वाली हैं और उन्होंने अपनी पढ़ाई हैदराबाद से की है.
आईएएस बनने के बाद साल 2009 में उनकी पहली तैनाती इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के फूलपुर में एसडीएम के रूप में हुई. उसी समय से वो सुर्ख़ियों में आनी शुरू हुईं और ये क्रम अब तक बना हुआ है.
साल 2012 में बी. चंद्रकला को हमीरपुर का डीएम बनाया गया और 2017 तक वो कुल पांच ज़िलों में डीएम की ज़िम्मेदारी निभा चुकी थीं.
लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार परवेज़ अहमद कहते हैं, "हमीरपुर में तैनाती के बाद से ही खनन को लेकर उनकी संदिग्ध भूमिका की चर्चा होने लगी थी. तमाम आलोचनाओं के बावजूद उनकी लगातार होती तरक़्क़ी से ये चर्चा आम हो गई कि वो सपा सरकार के बेहद क़रीब हैं."
हालांकि इस दौरान वो अक्सर अपनी कार्यशैली को लेकर भी चर्चा में रहीं. बुलंदशहर की डीएम रहते हुए उन्होंने एक स्थानीय ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हुआ.
उसके बाद तो ऐसे कई वीडियो वायरल हुए जिनमें बी. चंद्रकला अपने मातहत अधिकारियों और कर्मचारियों को ईमानदारी का पाठ पढ़ा रही हैं.
एक प्राथमिक स्कूल की जांच के दौरान वहां के विद्यार्थियों से उनका संवाद और फिर अध्यापकों को दी गई नसीहत का वीडियो भी काफ़ी सुर्ख़ियों में रहा था.
चंद्रकला को क़रीब से जानने वाले एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि सोशल मीडिया में सक्रियता और पब्लिसिटी के चलते उनके ऐसे कई काम मीडिया में जगह नहीं पा सके, जिनमें उनकी छवि ख़राब होती.
उनके मुताबिक़, "यदि मेरठ में वो बीजेपी के नेताओं से न उलझतीं, उन पर एक पार्टी विशेष के लिए काम करने का ठप्पा न लगता तो सत्ता परिवर्तन के बावजूद वो अपनी जगह बनाए रखतीं."
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान बी. चंद्रकला मेरठ के डीएम के पद पर तैनात थीं. बीजेपी नेताओं से उनकी जमकर तनातनी हुई और बीजेपी ने उनकी शिकायत चुनाव आयोग से भी की थी.
बीजेपी नेताओं ने उन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने और सत्ताधारी पार्टी की एजेंट के रूप में काम करने का आरोप लगाया था. बीजेपी ने उस वक़्त चुनाव आयोग से उनके ट्रांसफ़र की भी मांग की थी.
मेरठ के तत्कालीन विधायक और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी कहते हैं, "पिछली सरकारें अफ़सरों के तालमेल से जिस तरह से भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही थीं, ये उसका जीता-जागता उदाहरण है. ऐसे अफ़सर न सिर्फ़ उन सरकारों के ग़लत कार्यों को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे थे बल्कि पार्टी के एजेंट के रूप में कार्य कर रहे थे. हमलोगों ने तब भी उनकी शिकायत की थी, लेकिन तब हमारी सुनवाई नहीं हुई."
2017 में राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही बी. चंद्रकला के प्रभाव में भी परिवर्तन आ गया. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर पहले वो दिल्ली गईं लेकिन कुछ दिन पहले ही मूल कैडर में वापस आ गईं.
सीबीआई ने उन पर अवैध खनन मामले में छापेमारी की है, जब वो हमीरपुर ज़िले की कलेक्टर थीं.
बुंदेलखंड में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सागर कहते हैं, "केन, बेतवा और यमुना नदियों में अवैध खनन का कारोबार सत्ता समर्थित सिंडिकेट के ज़रिए होता है. बी. चंद्रकला जैसे अधिकारी वही करते हैं जो कि सत्ताधीशों और रसूख़दारों के हित में होता है और ये ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि ये इनके भी हित में होता है."
हालांकि, इस तरह की 'रॉबिनहुड' टाइप और ईमानदार छवि के बावजूद उन पर कई तरह के आरोप पहले भी लगे और कार्यशैली की आलोचना भी हुई लेकिन राज्य सरकारों की वो इतनी चहेती थीं कि उन पर कभी आंच नहीं आई.
साल 2008 बैच की आईएएस अधिकारी भुक्या चंद्रकला मूल रूप से तेलंगाना के करीमनगर की रहने वाली हैं और उन्होंने अपनी पढ़ाई हैदराबाद से की है.
आईएएस बनने के बाद साल 2009 में उनकी पहली तैनाती इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के फूलपुर में एसडीएम के रूप में हुई. उसी समय से वो सुर्ख़ियों में आनी शुरू हुईं और ये क्रम अब तक बना हुआ है.
साल 2012 में बी. चंद्रकला को हमीरपुर का डीएम बनाया गया और 2017 तक वो कुल पांच ज़िलों में डीएम की ज़िम्मेदारी निभा चुकी थीं.
लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार परवेज़ अहमद कहते हैं, "हमीरपुर में तैनाती के बाद से ही खनन को लेकर उनकी संदिग्ध भूमिका की चर्चा होने लगी थी. तमाम आलोचनाओं के बावजूद उनकी लगातार होती तरक़्क़ी से ये चर्चा आम हो गई कि वो सपा सरकार के बेहद क़रीब हैं."
हालांकि इस दौरान वो अक्सर अपनी कार्यशैली को लेकर भी चर्चा में रहीं. बुलंदशहर की डीएम रहते हुए उन्होंने एक स्थानीय ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हुआ.
उसके बाद तो ऐसे कई वीडियो वायरल हुए जिनमें बी. चंद्रकला अपने मातहत अधिकारियों और कर्मचारियों को ईमानदारी का पाठ पढ़ा रही हैं.
एक प्राथमिक स्कूल की जांच के दौरान वहां के विद्यार्थियों से उनका संवाद और फिर अध्यापकों को दी गई नसीहत का वीडियो भी काफ़ी सुर्ख़ियों में रहा था.
चंद्रकला को क़रीब से जानने वाले एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि सोशल मीडिया में सक्रियता और पब्लिसिटी के चलते उनके ऐसे कई काम मीडिया में जगह नहीं पा सके, जिनमें उनकी छवि ख़राब होती.
उनके मुताबिक़, "यदि मेरठ में वो बीजेपी के नेताओं से न उलझतीं, उन पर एक पार्टी विशेष के लिए काम करने का ठप्पा न लगता तो सत्ता परिवर्तन के बावजूद वो अपनी जगह बनाए रखतीं."
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान बी. चंद्रकला मेरठ के डीएम के पद पर तैनात थीं. बीजेपी नेताओं से उनकी जमकर तनातनी हुई और बीजेपी ने उनकी शिकायत चुनाव आयोग से भी की थी.
बीजेपी नेताओं ने उन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने और सत्ताधारी पार्टी की एजेंट के रूप में काम करने का आरोप लगाया था. बीजेपी ने उस वक़्त चुनाव आयोग से उनके ट्रांसफ़र की भी मांग की थी.
मेरठ के तत्कालीन विधायक और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी कहते हैं, "पिछली सरकारें अफ़सरों के तालमेल से जिस तरह से भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही थीं, ये उसका जीता-जागता उदाहरण है. ऐसे अफ़सर न सिर्फ़ उन सरकारों के ग़लत कार्यों को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे थे बल्कि पार्टी के एजेंट के रूप में कार्य कर रहे थे. हमलोगों ने तब भी उनकी शिकायत की थी, लेकिन तब हमारी सुनवाई नहीं हुई."
2017 में राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही बी. चंद्रकला के प्रभाव में भी परिवर्तन आ गया. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर पहले वो दिल्ली गईं लेकिन कुछ दिन पहले ही मूल कैडर में वापस आ गईं.
सीबीआई ने उन पर अवैध खनन मामले में छापेमारी की है, जब वो हमीरपुर ज़िले की कलेक्टर थीं.
बुंदेलखंड में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सागर कहते हैं, "केन, बेतवा और यमुना नदियों में अवैध खनन का कारोबार सत्ता समर्थित सिंडिकेट के ज़रिए होता है. बी. चंद्रकला जैसे अधिकारी वही करते हैं जो कि सत्ताधीशों और रसूख़दारों के हित में होता है और ये ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि ये इनके भी हित में होता है."
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