终于,经过四天超长时间的博弈,北京时间25日凌晨,中美最新一轮磋商在华盛顿结束了。
时间紧迫,分秒必争。牛弹琴获悉,在最后一天的中午,为抓紧时间,双方团队的午餐都是快餐,大家草草吃完,继续谈。
新华社随后发了一条消息通稿,部分如下:
双方进一步落实两国元首阿根廷会晤达成的重要共识,围绕协议文本开展谈判,在技术转让、知识产权保护、非关税壁垒、服务业、农业以及汇率等方面的具体问题上取得实质性进展。在此基础上,双方将按照两国元首指示做好下一步工作。
稍早前,特朗普连发两条推特,大致是中美磋商很富有成果,他将推迟3月1日上调中国输美商品关税的计划,对美中来说,这是一个非常不错的周末。
两者都不长,但正所谓“新闻越短,事情越大”,信息量非常大。
虽然有点套路,但在牛弹琴看来,这一次确实又传递了三个信号,很清晰,很意味深长。
信号一,谈判已进入到最后阶段,开始准备协议文本了。
在新华社的通稿中,有这样一句话:
双方进一步落实两国元首阿根廷会晤达成的重要共识,围绕协议文本开展谈判……
请注意关键词:进一步落实,协议文本。
要知道,在2月15日结束的上一轮磋商中,最后的表述是:(双方)认真落实……
现在很明确:“进一步”。
更重要的是,“围绕协议文本开展谈判”,这是这一轮磋商所特有的。
因此,基本可以肯定:
备忘录这个事,牛弹琴昨天的文章也都详细解释了,对中国来说,不管是备忘录还是协议,其实文本还是那个文本,该怎么谈还怎么谈,外甥打灯笼——照旧!
超长时间的磋商,已开始进入文本谈判。如果顺利的话,经过一年的打打谈谈,史无前例的中美贸易战,将最终告一段落了。
当然,不到最后时刻,变数依然存在。原因,你懂的。
信号二,谈判取得重大突破,涉及多个领域。
之所以谈判能到最后阶段,是因为双方在一些棘手的问题上取得了突破。
在推特上,特朗普就用了“很富有成果”的表述。
新华社通稿,则这样表述:
(双方)在技术转让、知识产权保护、非关税壁垒、服务业、农业以及汇率等方面的具体问题上取得实质性进展。
关键词:具体问题,实质性进展。
要知道,在第六轮磋商中,还是“进行了深入交流”,现在措辞进了一步,“取得实质性进展”。
而且,这次还特意提到,“具体问题”。
从“深入交流”到“实质性进展”,意味着谈判取得重大突破。
“具体问题”,则意味着不再是泛泛谈某个原则,而是触及具体的细节。
具体哪些领域呢?新华社通稿提到了以下方面:
这个“等”,包括了很多,也给中美各自表述留下了空间。
既然取得了重大突破,那就为最终协议创造了条件。当然,如果最终再出现变故,那所有成果又是一风吹。美国大豆,那对不起,肯定还得烂在美国仓库里。
这种率性造成的重大代价,相信任何一方都必须仔细掂量。
信号三,历史性时刻,可能不太远了。
新华社通稿最后两句话,是这样说的:
在此基础上,双方将按照两国元首指示做好下一步工作。
似乎很平淡无奇,但结合中美官方最近几天披露的信息,有太多的信息量。
1,没说是否要进行下一轮磋商,更可以理解为谈判已接近尾声。当然,也不排除再谈一两次。
2,按照两国元首指示做好下一步工作,这次谈判确实关系重大,必须向双方最高领导人汇报;一些最棘手的问题,可能还要他们来定夺。
在推特上,特朗普就以颇为兴奋的口吻说:正在海湖庄园准备他和中国最高领导人的峰会,缔结协议。
随后,特朗普更宣布:假如进展顺利,未来一两周会有大消息。
此前的2月23日,在白宫会见刘鹤时,特朗普就明确表示:我非常期待在不久的将来再次同中国最高领导人会晤,共同见证美中经贸关系的历史性时刻。
至于“见证”的表述,其实说白了,就是在接下来的这次元首会晤,中美可能将签署最终的贸易协定。
如果是这样的话,毫无疑问,这将是一个历史性的协议,一次历史性的会晤。
但这真是一次世纪谈判,更是一次苦战。
算起来,整整一年时间,不算副部级等工作层面的谈判,光高级别磋商就前后举行了七轮。在多轮谈判过程中,双方应该不乏拍桌子瞪眼睛的场景,终于,双方接近达成最终都能接受的协议。
谈判是妥协的艺术。必须看到,中美其实都作出了某种让步,最终避免了两败俱伤的后果,这非常不容易,也充分反映了双方团队的智慧和谋略。
当然,作为一个多元的社会,如同美国一样,对于最终的结果,中国社会肯定会有不同的看法。事实上,在牛弹琴的后台上,尽管大家都不清楚最终谈判结果,但还是有不少先入为主的很尖锐的意见。
这就牵涉到我们怎么来看利益。
从领域看,利益有个人利益,家庭利益,集体利益,国家利益。
从时间看,利益又有当前利益,短期利益,中期利益,长远利益。
谁都知道,鱼和熊掌不可兼得。但触动利益,必然会影响一些人的情绪。因此,对于可能出现的一些误解、担忧乃至批评,我们应该坦然面对,正确引导。
但最重要也是最根本的,我们一定要清楚,什么是我们的核心国家利益和长远利益。
我们仍处于战略机遇期,而经贸是中美关系的压舱石和推进器。经贸关系稳住了,中美关系就稳住了。中美关系稳住了,中国就不会失去当前的战略机遇期。
Monday, February 25, 2019
Tuesday, February 19, 2019
华为任正非接受BBC独家专访:“美国不可能扼杀掉我们”
华为(Huawei)创始人任正非接受BBC独家专访时表示,美国“不可能扼杀掉”这家中国科技公司。
任正非形容,对华为首席财务官、他的女儿孟晚舟的拘捕行动是带有政治动机的。
美国方面正在寻求对华为和孟晚舟进行刑事检控,罪名包括洗钱、银行诈骗以及盗取商业机密等等。
华为否认有任何不当行为。
这是孟晚舟被捕事件之后,任正非第一次接受国际媒体专访。他向BBC亚洲商务记者卡利什玛·瓦斯瓦尼(Karishma Vaswani)表示,美国的压力并不会压垮华为。
“它不可能扼杀掉我们,”任正非说,“因为这世界离不开我们,因为我们比较先进。我认为即使他们说服了更多的国家暂时不用我们,我们也可以收缩,变小一点嘛。”
他表示,美国不断地质疑和“挑剔”华为,也能迫使华为将自己的产品和服务做得更好。
不过,任正非承认,由此造成的潜在客户流失可能会给华为带来重大冲击。
上周,美国国务卿蓬佩奥(Mike Pompeo)警告美国诸盟友,不要使用华为公司的技术,指一旦那样做,就会令华盛顿“与它们并肩合作”更加困难。
澳大利亚、新西兰和美国已经禁止华为向它们提供未来5G移动宽频网络的设备,而加拿大则正在重新复核该公司的产品,看是否存在严重的安全威胁。
任正非在访问中警告说:“世界离不开我们,因为我们比较先进。”
他否认美国对华为的打击会令华为陷入困境。
“那西方不亮还有东方亮啊,黑了北方还有南方啊,对吧?”任正非在访问中笑着说。
“美国不代表全世界,美国只代表一部分人。”
“信任”英国
英国国家网络安全中心(National Cyber Security Centre)则认为,使用华为的技术对英国通讯项目可能带来的风险都属于可控制范围内。
包括沃达丰(Vodafone)、EE和3(Three UK)在内的很多英国移动通讯公司都在与华为合作发展它们的5G网络。
这些公司正在等候政府的复核,结果定于三月或四月得出,届时将决定英国公司是否可以使用华为的技术。
在谈到英国也可能禁用华为技术时,任正非表示,华为“还会继续英国投资”。
“我们对英国还是信任的,”任正非强调说。
“我们希望英国更信任我们,我们(就会)更大规模地投资到英国。”
任正非形容,对华为首席财务官、他的女儿孟晚舟的拘捕行动是带有政治动机的。
美国方面正在寻求对华为和孟晚舟进行刑事检控,罪名包括洗钱、银行诈骗以及盗取商业机密等等。
华为否认有任何不当行为。
这是孟晚舟被捕事件之后,任正非第一次接受国际媒体专访。他向BBC亚洲商务记者卡利什玛·瓦斯瓦尼(Karishma Vaswani)表示,美国的压力并不会压垮华为。
“它不可能扼杀掉我们,”任正非说,“因为这世界离不开我们,因为我们比较先进。我认为即使他们说服了更多的国家暂时不用我们,我们也可以收缩,变小一点嘛。”
他表示,美国不断地质疑和“挑剔”华为,也能迫使华为将自己的产品和服务做得更好。
不过,任正非承认,由此造成的潜在客户流失可能会给华为带来重大冲击。
上周,美国国务卿蓬佩奥(Mike Pompeo)警告美国诸盟友,不要使用华为公司的技术,指一旦那样做,就会令华盛顿“与它们并肩合作”更加困难。
澳大利亚、新西兰和美国已经禁止华为向它们提供未来5G移动宽频网络的设备,而加拿大则正在重新复核该公司的产品,看是否存在严重的安全威胁。
任正非在访问中警告说:“世界离不开我们,因为我们比较先进。”
他否认美国对华为的打击会令华为陷入困境。
“那西方不亮还有东方亮啊,黑了北方还有南方啊,对吧?”任正非在访问中笑着说。
“美国不代表全世界,美国只代表一部分人。”
“信任”英国
英国国家网络安全中心(National Cyber Security Centre)则认为,使用华为的技术对英国通讯项目可能带来的风险都属于可控制范围内。
包括沃达丰(Vodafone)、EE和3(Three UK)在内的很多英国移动通讯公司都在与华为合作发展它们的5G网络。
这些公司正在等候政府的复核,结果定于三月或四月得出,届时将决定英国公司是否可以使用华为的技术。
在谈到英国也可能禁用华为技术时,任正非表示,华为“还会继续英国投资”。
“我们对英国还是信任的,”任正非强调说。
“我们希望英国更信任我们,我们(就会)更大规模地投资到英国。”
Wednesday, February 13, 2019
सिर्फ़ 4 घंटे में तैयार हो जाते हैं ये छोटे घर
फ़िलीपींस एशिया के उन देशों में से एक है जहां की आबादी सबसे तेज़ रफ़्तार से बढ़ रही है. बढ़ती आबादी के लिए घर की ज़रूरत है और फ़िलहाल वहां 50 लाख घरों की कमी है.
एक अनुमान के मुताबिक़ फ़िलीपींस को साल 2030 तक एक करोड़ 20 लाख नये घरों की ज़रूरत होगी.
इसका मतलब यह हुआ कि अगर फ़िलीपींस सबके लिए घर का सपना सच करना चाहता है तो उसे हर साल 10 लाख नये घर बनाने होंगे. ये काम 2019 से ही शुरू कर देना होगा.
फ़िलीपींस के लिए इतने घर बनाना बड़ी चुनौती है. इसके लिए भारी मात्रा में संसाधनों की ज़रूरत होगी, जिसे जुटाना आसान नहीं है.
फ़िलीपींस की इस बड़ी समस्या को बांस के पेड़ सुलझा सकते हैं. इस देश की जलवायु में बांस तेज़ी से उगते और बढ़ते हैं. इनसे टिकाऊ बिल्डिंग मैटेरियल तैयार किया जा सकता है.
अर्ल फ़ोर्लेल्स फ़िलीपींस की क्वेज़ॉन सिटी में रहने वाले युवा इंजीनियर और उद्यमी हैं. वह कहते हैं, "आवास की कमी तेज़ी से बढ़ती हुई समस्या है और इसके तुरंत समाधान की ज़रूरत है."
फोर्लेल्स ने फ़िलीपींस के पारंपरिक बांस के घरों (बहाय कूबो) को अपग्रेड करने की योजना बनाई है.
पढ़ें- क्या आपको पता हैं छोटे घरों के 'डर्टी सीक्रेट्स'
वह कहते हैं, "बांस का इस्तेमाल कई तरह से किया जा सकता है. अगर आप इसे सही से प्रोसेस करें तो इसकी उम्र 50 साल तक हो सकती है."
फ़िलीपींस में बांस केवल 3 साल में तैयार हो जाते हैं. वह कहते हैं, "हमारे लिए अच्छी बात यह है कि यहां बांस की सप्लाई की कोई कमी नहीं है."
फ़ोर्लेल्स 'क्यूबो मॉड्यूलर' नाम की कंपनी के सीईओ हैं. उनकी कंपनी बांस से कॉम्पैक्ट घर बनाने के आइडिया पर काम कर रही है.
ये कंपनी बांस को प्रोसेस करती है. बांस को चौड़े प्लाइवुड की शक्ल दी जाती है. बांस की परतों को जोड़कर चौखट और खंभे भी बनाए जाते हैं.
घर के तमाम हिस्सों को बिल्डिंग साइट से दूर फ़ैक्ट्री में तैयार किया जाता है, जिसमें हफ़्ते भर से भी कम समय लगता है.
फोर्लेल्स की कंपनी घर के उन हिस्सों को साइट पर ले जाकर सिर्फ़ 4 घंटे में जोड़ देती है. इस तरह बिना लंबा इंतज़ार किए और बिना ज़्यादा ख़र्च के एक घर तैयार हो जाता है.
छोटे और आरामदायक घर
फोर्लेल्स कहते हैं, "यह हमारे पारंपरिक बहाय कूबो (बांस के घर) की तरह ही हैं."
पढ़ें-क्या घर के हर काम से छुटकारा दिला पाएगा रोबोट?
कूबो का कॉन्सेप्ट बहुत कॉम्पैक्ट होता है, लेकिन इसमें ज़रूरत की वे सभी चीज़ें होती हैं जिनको फ़िलीपींस के लोग अपने घरों में रखते हैं.
फोर्लेल्स के बनाए छोटे घरों में भी सोफ़ा, सेंट्रल टेबल, बेड, टीवी, फ़्रिज जैसा ज़रूरत की तमाम चीज़ें होती हैं. यहां तक कि छत पर जाने की सीढ़ी भी बनाई जाती है.
फोर्लेल्स बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही बांस की चीज़ों को ठोकने-पीटने, उनकी मरम्मत करने में मज़ा आता था.
वह अपनी मां से खिलौने ख़रीदने की ज़िद करते थे. खिलौने मिल जाने पर वह उनको खोलकर देखते थे कि यह काम कैसे करता है या इन्हें जोड़ कर बनाया कैसे जा सकता है.
कुछ नया करने की चाहत
वक़्त और उम्र के साथ भी फोर्लेल्स की आदत नहीं बदली.
वह बताते हैं, "कॉलेज में मैंने मैटेरियल साइंस और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. मैं जानना चाहता था कि चीज़ें आख़िर काम कैसे करती हैं और कैसे हम उनमें थोड़ा बदलाव लाकर उनको और अपनी ज़िंदगी को बेहतर बना सकते हैं."
सवाल है कि क्या उनके पास फ़िलीपींस की आवास समस्या का समाधान है? और क्या इस आइडिया को दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी आज़माया जा सकता है?
फोर्लेल्स एशिया में ही नहीं, बल्कि लैटिन अमरीका और अफ़्रीकी देशों में भी बांस के घर बनाना चाहते हैं.
वह कहते हैं, "हम मानते हैं कि यह उपाय वहां भी आज़माया जा सकता है और लाखों लोगों की घर की ज़रूरत पूरी हो सकती है."
एक अनुमान के मुताबिक़ फ़िलीपींस को साल 2030 तक एक करोड़ 20 लाख नये घरों की ज़रूरत होगी.
इसका मतलब यह हुआ कि अगर फ़िलीपींस सबके लिए घर का सपना सच करना चाहता है तो उसे हर साल 10 लाख नये घर बनाने होंगे. ये काम 2019 से ही शुरू कर देना होगा.
फ़िलीपींस के लिए इतने घर बनाना बड़ी चुनौती है. इसके लिए भारी मात्रा में संसाधनों की ज़रूरत होगी, जिसे जुटाना आसान नहीं है.
फ़िलीपींस की इस बड़ी समस्या को बांस के पेड़ सुलझा सकते हैं. इस देश की जलवायु में बांस तेज़ी से उगते और बढ़ते हैं. इनसे टिकाऊ बिल्डिंग मैटेरियल तैयार किया जा सकता है.
अर्ल फ़ोर्लेल्स फ़िलीपींस की क्वेज़ॉन सिटी में रहने वाले युवा इंजीनियर और उद्यमी हैं. वह कहते हैं, "आवास की कमी तेज़ी से बढ़ती हुई समस्या है और इसके तुरंत समाधान की ज़रूरत है."
फोर्लेल्स ने फ़िलीपींस के पारंपरिक बांस के घरों (बहाय कूबो) को अपग्रेड करने की योजना बनाई है.
पढ़ें- क्या आपको पता हैं छोटे घरों के 'डर्टी सीक्रेट्स'
वह कहते हैं, "बांस का इस्तेमाल कई तरह से किया जा सकता है. अगर आप इसे सही से प्रोसेस करें तो इसकी उम्र 50 साल तक हो सकती है."
फ़िलीपींस में बांस केवल 3 साल में तैयार हो जाते हैं. वह कहते हैं, "हमारे लिए अच्छी बात यह है कि यहां बांस की सप्लाई की कोई कमी नहीं है."
फ़ोर्लेल्स 'क्यूबो मॉड्यूलर' नाम की कंपनी के सीईओ हैं. उनकी कंपनी बांस से कॉम्पैक्ट घर बनाने के आइडिया पर काम कर रही है.
ये कंपनी बांस को प्रोसेस करती है. बांस को चौड़े प्लाइवुड की शक्ल दी जाती है. बांस की परतों को जोड़कर चौखट और खंभे भी बनाए जाते हैं.
घर के तमाम हिस्सों को बिल्डिंग साइट से दूर फ़ैक्ट्री में तैयार किया जाता है, जिसमें हफ़्ते भर से भी कम समय लगता है.
फोर्लेल्स की कंपनी घर के उन हिस्सों को साइट पर ले जाकर सिर्फ़ 4 घंटे में जोड़ देती है. इस तरह बिना लंबा इंतज़ार किए और बिना ज़्यादा ख़र्च के एक घर तैयार हो जाता है.
छोटे और आरामदायक घर
फोर्लेल्स कहते हैं, "यह हमारे पारंपरिक बहाय कूबो (बांस के घर) की तरह ही हैं."
पढ़ें-क्या घर के हर काम से छुटकारा दिला पाएगा रोबोट?
कूबो का कॉन्सेप्ट बहुत कॉम्पैक्ट होता है, लेकिन इसमें ज़रूरत की वे सभी चीज़ें होती हैं जिनको फ़िलीपींस के लोग अपने घरों में रखते हैं.
फोर्लेल्स के बनाए छोटे घरों में भी सोफ़ा, सेंट्रल टेबल, बेड, टीवी, फ़्रिज जैसा ज़रूरत की तमाम चीज़ें होती हैं. यहां तक कि छत पर जाने की सीढ़ी भी बनाई जाती है.
फोर्लेल्स बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही बांस की चीज़ों को ठोकने-पीटने, उनकी मरम्मत करने में मज़ा आता था.
वह अपनी मां से खिलौने ख़रीदने की ज़िद करते थे. खिलौने मिल जाने पर वह उनको खोलकर देखते थे कि यह काम कैसे करता है या इन्हें जोड़ कर बनाया कैसे जा सकता है.
कुछ नया करने की चाहत
वक़्त और उम्र के साथ भी फोर्लेल्स की आदत नहीं बदली.
वह बताते हैं, "कॉलेज में मैंने मैटेरियल साइंस और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. मैं जानना चाहता था कि चीज़ें आख़िर काम कैसे करती हैं और कैसे हम उनमें थोड़ा बदलाव लाकर उनको और अपनी ज़िंदगी को बेहतर बना सकते हैं."
सवाल है कि क्या उनके पास फ़िलीपींस की आवास समस्या का समाधान है? और क्या इस आइडिया को दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी आज़माया जा सकता है?
फोर्लेल्स एशिया में ही नहीं, बल्कि लैटिन अमरीका और अफ़्रीकी देशों में भी बांस के घर बनाना चाहते हैं.
वह कहते हैं, "हम मानते हैं कि यह उपाय वहां भी आज़माया जा सकता है और लाखों लोगों की घर की ज़रूरत पूरी हो सकती है."
Wednesday, February 6, 2019
सेक्स से होने वाली चार नई ख़तरनाक बीमारियां
आए दिन दुनिया में नई-नई बीमारियां सामने आती हैं और यौन संक्रमण से होने वाली बीमारियां (एसटीआई) कोई अपवाद नहीं हैं.
ऐसे ही चार बैक्टीरियां के बारे में हम आपको बता रहे हैं जो लोगों के स्वास्थ्य को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं.
नाइसेरिया मेनिन्जाइटिस
नाइसेरिया मेनिन्जाइटिस को मेनिन्गोकस के नाम से भी जानते हैं. ये बैक्टीरिया दिमाग़ और रीढ़ की हड्डियों को संक्रमित कर सकता है. लेकिन इससे कई ज़्यादा ये यूरोजेनिटल संक्रमण के लिए जाना जाता है.
70 के दशक का अध्ययन बताता है कि कैसे एक चिम्पैंज़ी के नाक और गले से होता हुआ ये बैक्टीरिया उसके जननांग तक जा पहुंचा और उसे यूथरल संक्रमण हुआ.
लगभग 5 से 10 फ़ीसदी नौजवानों में नाइसेरिया मेनिंजाइटिस बैक्टीरिया गले या नाक के माध्यम से पहुंचते हैं.
एक अध्ययन के मुताबिक ये संक्रमण एक शख्स से उनके पार्टनर में ओरल सेक्स और अन्य तरह के संपर्क से पहुंच सकता है.
कुल पांच तरह के एन. मेनिन्जाइटिस दुनिया भर में होने वाले यौन संक्रमण के लिए ज़िम्मेदार हैं. हालांकि इस बैक्टीरिया के लिए दो वैक्सीन उपलब्ध हैं जिनकी मदद से इस बैक्टीरिया के प्रभाव को कम किया जा सकता है.
पढ़ें- वो अंडे जो करेंगे कैंसर का ख़ात्मा
माइकोप्लाज़मा जेनिटेलियम
माइकोप्लाज़मा जेनिटेलियम दुनिया के सबसे सूक्ष्म बैक्टीरिया में से एक है, लेकिन इससे होने वाले सेक्शुअल ट्रांसमिटेड संक्रमण दुनिया में बड़ी परेशानी का कारण बनता जा रहा है.
इसे 1980 के दशक में पहचाना गया, इस बैक्टीरिया ने इस वक्त लगभग 1 फ़ीसदी से 2 फ़ीसदी लोगों को संक्रमित किया है. ख़ास कर ये युवा और वयस्कों में ज्यादा तेज़ी से फैलता है.
ये बैक्टीरिया महिलाओं की प्रजनन प्रणाली में पैल्विक सूजन का कारण बनता है. जिससे बांझपन, गर्भपात, समय से पहले प्रसव और यहां तक कि भ्रूण की मृत्यु तक हो सकती है.
कॉन्डोम का इस्तेमाल इस संक्रमण को पार्टनर तक पहुंचने से रोक सकता है.
शोधकर्ताओं ने एम. जेनिटेलियम को रोकने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं खासकर एजिथ्रोमाइसिन और डॉक्सीसाइक्लिन का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है.
शिगेला फ़्लेक्ज़ेनरी
इसे शिग्लोसिस के नाम से भी जानते हैं. ये इंसानी मल के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संपर्क में आने से फैलता है. इस संक्रमण के बाद पेट में तेज़ दर्द, डायरिया जैसी शिकायत होती है औ इसके इस तरह ये बैक्टीरिया अपना संक्रमण आगे तक फैलाता है.
पढ़ें-क्या नाश्ता करना सच में फ़ायदेमंद है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि एस. फ़्लेक्ज़ेनरी मूल रूप से ओरल सेक्स और एनल सेक्स के जरिए फैलता है. दुनिया भर में इसके संक्रमण के मामले तेज़ी से सामने आ रहे हैं.
क्लैमाइडिया ट्रेकोमैटिस के असामान्य तनाव के कारण होने वाला यह एसटीआई (सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफ़ेक्शन), 'भयानक संक्रमण' का कारण बन सकता है.
एलजीवी के संक्रमण के कारण अस्थायी पिंपल, जननांग में अल्सर की परेशानी हो सकती है और फिर इसका बैक्टीरिया शरीर के लसिका तंत्र पर आक्रमण कर देता है.
रेक्टल संक्रमण आंत से जुड़ी बीमारियां दे सकता है. मलाशय की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.
पिछले एक दशक से एलजीवी यूरोप और उत्तरी अमेरिका में तेजी से बढ़ता जा रहा है. खास तौर पर ये बीमारी बाईसेक्शुअल और गे लोगों में आम होती जा रही है.
ऐसे ही चार बैक्टीरियां के बारे में हम आपको बता रहे हैं जो लोगों के स्वास्थ्य को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं.
नाइसेरिया मेनिन्जाइटिस
नाइसेरिया मेनिन्जाइटिस को मेनिन्गोकस के नाम से भी जानते हैं. ये बैक्टीरिया दिमाग़ और रीढ़ की हड्डियों को संक्रमित कर सकता है. लेकिन इससे कई ज़्यादा ये यूरोजेनिटल संक्रमण के लिए जाना जाता है.
70 के दशक का अध्ययन बताता है कि कैसे एक चिम्पैंज़ी के नाक और गले से होता हुआ ये बैक्टीरिया उसके जननांग तक जा पहुंचा और उसे यूथरल संक्रमण हुआ.
लगभग 5 से 10 फ़ीसदी नौजवानों में नाइसेरिया मेनिंजाइटिस बैक्टीरिया गले या नाक के माध्यम से पहुंचते हैं.
एक अध्ययन के मुताबिक ये संक्रमण एक शख्स से उनके पार्टनर में ओरल सेक्स और अन्य तरह के संपर्क से पहुंच सकता है.
कुल पांच तरह के एन. मेनिन्जाइटिस दुनिया भर में होने वाले यौन संक्रमण के लिए ज़िम्मेदार हैं. हालांकि इस बैक्टीरिया के लिए दो वैक्सीन उपलब्ध हैं जिनकी मदद से इस बैक्टीरिया के प्रभाव को कम किया जा सकता है.
पढ़ें- वो अंडे जो करेंगे कैंसर का ख़ात्मा
माइकोप्लाज़मा जेनिटेलियम
माइकोप्लाज़मा जेनिटेलियम दुनिया के सबसे सूक्ष्म बैक्टीरिया में से एक है, लेकिन इससे होने वाले सेक्शुअल ट्रांसमिटेड संक्रमण दुनिया में बड़ी परेशानी का कारण बनता जा रहा है.
इसे 1980 के दशक में पहचाना गया, इस बैक्टीरिया ने इस वक्त लगभग 1 फ़ीसदी से 2 फ़ीसदी लोगों को संक्रमित किया है. ख़ास कर ये युवा और वयस्कों में ज्यादा तेज़ी से फैलता है.
ये बैक्टीरिया महिलाओं की प्रजनन प्रणाली में पैल्विक सूजन का कारण बनता है. जिससे बांझपन, गर्भपात, समय से पहले प्रसव और यहां तक कि भ्रूण की मृत्यु तक हो सकती है.
कॉन्डोम का इस्तेमाल इस संक्रमण को पार्टनर तक पहुंचने से रोक सकता है.
शोधकर्ताओं ने एम. जेनिटेलियम को रोकने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं खासकर एजिथ्रोमाइसिन और डॉक्सीसाइक्लिन का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है.
शिगेला फ़्लेक्ज़ेनरी
इसे शिग्लोसिस के नाम से भी जानते हैं. ये इंसानी मल के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संपर्क में आने से फैलता है. इस संक्रमण के बाद पेट में तेज़ दर्द, डायरिया जैसी शिकायत होती है औ इसके इस तरह ये बैक्टीरिया अपना संक्रमण आगे तक फैलाता है.
पढ़ें-क्या नाश्ता करना सच में फ़ायदेमंद है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि एस. फ़्लेक्ज़ेनरी मूल रूप से ओरल सेक्स और एनल सेक्स के जरिए फैलता है. दुनिया भर में इसके संक्रमण के मामले तेज़ी से सामने आ रहे हैं.
क्लैमाइडिया ट्रेकोमैटिस के असामान्य तनाव के कारण होने वाला यह एसटीआई (सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफ़ेक्शन), 'भयानक संक्रमण' का कारण बन सकता है.
एलजीवी के संक्रमण के कारण अस्थायी पिंपल, जननांग में अल्सर की परेशानी हो सकती है और फिर इसका बैक्टीरिया शरीर के लसिका तंत्र पर आक्रमण कर देता है.
रेक्टल संक्रमण आंत से जुड़ी बीमारियां दे सकता है. मलाशय की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.
पिछले एक दशक से एलजीवी यूरोप और उत्तरी अमेरिका में तेजी से बढ़ता जा रहा है. खास तौर पर ये बीमारी बाईसेक्शुअल और गे लोगों में आम होती जा रही है.
Monday, February 4, 2019
क्रिकेट वर्ल्ड कपः कौन टीम में होगा अंदर, कौन बाहर?
विराट कोहली की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट टीम ने नए मोर्चों पर सफलता हासिल की है. ऑस्ट्रेलिया को उनकी धरती पर हराना और फिर किवी टीम को चारों खाने चित्त करने के बाद अब एक आख़िरी मोर्चा फ़तह करने को बचा है, और वो है आईसीसी वर्ल्ड कप.
क्रिकेट वर्ल्ड कप इस साल इंग्लैंड में खेला जाएगा. आईसीसी की रैंकिंग में मेज़बान टीम फिलहाल नंबर एक पर काबिज़ है जबकि टीम इंडिया दूसरे नंबर पर है.
वैसे डेव रिचर्डसन और ऐंडी फ्लावर जैसे दिग्गज कोहली की टीम को वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा दावेदार मान रहे हैं लेकिन भारतीय टीम के सामने एक बड़ी अड़चन अभी बाकी है - टीम के संतुलन को बनाए रखने के लिए 15 खिलाड़ियों का चयन.
जहां कुछ खिलाड़ियों की जगह पक्की है, टीम में कुछ ऐसे स्थान है जिनपर कब्ज़ा जमाने के लिए भारी खींचातान चल रही है.
अगर ये खिलाड़ी बदकिस्मती से चोटिल न हों तो इंग्लैंड में ज़रूर दिखेंगे- विराट कोहली, रोहित शर्मा, शिखर धवन, महेंद्र सिंह धोनी, हार्दिक पांड्या, केदार जाधव, कुलदीप यादव, युजवेंद्र चहल, भुवनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी.
लेकिन कुछ ऐसे स्थान हैं, जो अभी भी पक्के नहीं हैं.
लगभग 06 हफ्तों तक चलने वाले वर्ल्ड कप में दूसरे विकेटकीपर की ज़रूरत पड़ सकती है. चयनकर्ताओं के सामने बड़ा सवाल है कि किसे चुनें- अनुभवी दिनेश कार्तिक या फिर युवा जज़्बे से लबरेज़ ऋषभ पंत को?
कार्तिक ने पिछले साल कुछ बेहतरीन पारियों सें भारत के लिए गेम फिनिश किया है लेकिन ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ कुछ खास नहीं कर पाए. वहीं, भले ही टेस्ट मैचों में, लेकिन इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में शतक लगाकर पंत ने अपना परचम मज़बूत किया है.
पंत लंबे हिट्स लगाते हैं और पांड्या के साथ मिलकर वो लेट मिडिल ऑर्डर में विपक्षी टीमों पर कहर बरपा सकते हैं. इस रेस में फिलहाल पंत आगे चल रहे हैं.
नंबर चार
पिछले कुछ साल से ये पोजिशन टीम इंडिया की गले का फांस बना हुआ है. हालांकि ऊपर बताए गए तय खिलाडियों में से धोनी या जाधव यहां खेल सकते हैं. कार्तिक और पंत भी इस नंबर पर बैटिंग कर सकते हैं. लेकिन ये पोजिशन 15 की टीम में अतिरिक्त बल्लेबाज़ का भी बन सकता है.
अंबाटी रायडू ने न्यूज़ीलैंड में आख़िरी गेम में मैच जिताने वाली पारी खेलकर बढ़त बना ली है. कप्तान कोहली भी खेल के प्रति उनके रवैये को पसंद करते हैं. इस रेस में मनीष पांडे, श्रेयस अय्यर, के एल राहुल, पृथ्वी शॉ और शुभमान गिल जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं.
दूसरा ऑलराउंडर
पांड्या के अलावा दूसरा रेगुलर ऑलराउंडर कौन होगा? अनुभव के आधार पर रविंद्र जडेजा का नाम पहले आता है. लेकिन उनके सामने क्रुणाल पांड्या और विजय शंकर की कड़ी चुनौती होगी.
इंग्लैंड में जब दो स्पिनर, चहल और कुलदीप पहले ही टीम में होंगे, तो क्या तीसरे स्पिनर की ज़रूरत पडेगी? केदार जाधव भी कुछ ओवर स्पिन के करेंगे. ये स्पॉट चयनकर्ताओं का कड़ा इम्तिहान लेगा.
पांचवा सीमर
जसप्रीत बुमराह, भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद शमी और हार्दिक पांड्या तय चार तेज़ गेदबाज़ हैं, बिसात पांचवे सीमर के लिए बिछी हुई है.
पिछले दो साल में भारत की सफलता में सबसे बड़ा हाथ तेज़ गेंदबाज़ी का माना जाता है, ऐसे में पांचवा गेंदबाज़ कहीं कमज़ोर कड़ी न साबित हो?
इस जगह के लिए मोहम्मद खलील, शार्दुल ठाकुर, उमेश यादव, मोहम्मद शिराज़ जैसे गेंदबाज़ सेलेकटर्स की रडार पर रहेंगे. खलील क्योंकि बाएं हाथ के गेंदबाज़ हैं, इसलिए वो अटैक में वैरायटी लाते हैं. शायद इसी वजह से मोहम्मद खलील चुने जा सकते हैं, लेकिन ये तय नहीं है.
वर्ल्ड कप से पहले दो बड़े टूर्नामेंट होने वाले हैं. ऑस्ट्रेलिया की टीम वनडे मैचों के लिए भारत का दौरा करेगी और उसके बाद आईपीएल का टी-20 क्रिकेट होना है. इन दोनों में खिलाड़ियों के पास मौका होगा कि वो शानदार खेल से चयनकर्ताओं का ध्यान अपने उपर खींचें.
क्रिकेट वर्ल्ड कप इस साल इंग्लैंड में खेला जाएगा. आईसीसी की रैंकिंग में मेज़बान टीम फिलहाल नंबर एक पर काबिज़ है जबकि टीम इंडिया दूसरे नंबर पर है.
वैसे डेव रिचर्डसन और ऐंडी फ्लावर जैसे दिग्गज कोहली की टीम को वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा दावेदार मान रहे हैं लेकिन भारतीय टीम के सामने एक बड़ी अड़चन अभी बाकी है - टीम के संतुलन को बनाए रखने के लिए 15 खिलाड़ियों का चयन.
जहां कुछ खिलाड़ियों की जगह पक्की है, टीम में कुछ ऐसे स्थान है जिनपर कब्ज़ा जमाने के लिए भारी खींचातान चल रही है.
अगर ये खिलाड़ी बदकिस्मती से चोटिल न हों तो इंग्लैंड में ज़रूर दिखेंगे- विराट कोहली, रोहित शर्मा, शिखर धवन, महेंद्र सिंह धोनी, हार्दिक पांड्या, केदार जाधव, कुलदीप यादव, युजवेंद्र चहल, भुवनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी.
लेकिन कुछ ऐसे स्थान हैं, जो अभी भी पक्के नहीं हैं.
लगभग 06 हफ्तों तक चलने वाले वर्ल्ड कप में दूसरे विकेटकीपर की ज़रूरत पड़ सकती है. चयनकर्ताओं के सामने बड़ा सवाल है कि किसे चुनें- अनुभवी दिनेश कार्तिक या फिर युवा जज़्बे से लबरेज़ ऋषभ पंत को?
कार्तिक ने पिछले साल कुछ बेहतरीन पारियों सें भारत के लिए गेम फिनिश किया है लेकिन ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ कुछ खास नहीं कर पाए. वहीं, भले ही टेस्ट मैचों में, लेकिन इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में शतक लगाकर पंत ने अपना परचम मज़बूत किया है.
पंत लंबे हिट्स लगाते हैं और पांड्या के साथ मिलकर वो लेट मिडिल ऑर्डर में विपक्षी टीमों पर कहर बरपा सकते हैं. इस रेस में फिलहाल पंत आगे चल रहे हैं.
नंबर चार
पिछले कुछ साल से ये पोजिशन टीम इंडिया की गले का फांस बना हुआ है. हालांकि ऊपर बताए गए तय खिलाडियों में से धोनी या जाधव यहां खेल सकते हैं. कार्तिक और पंत भी इस नंबर पर बैटिंग कर सकते हैं. लेकिन ये पोजिशन 15 की टीम में अतिरिक्त बल्लेबाज़ का भी बन सकता है.
अंबाटी रायडू ने न्यूज़ीलैंड में आख़िरी गेम में मैच जिताने वाली पारी खेलकर बढ़त बना ली है. कप्तान कोहली भी खेल के प्रति उनके रवैये को पसंद करते हैं. इस रेस में मनीष पांडे, श्रेयस अय्यर, के एल राहुल, पृथ्वी शॉ और शुभमान गिल जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं.
दूसरा ऑलराउंडर
पांड्या के अलावा दूसरा रेगुलर ऑलराउंडर कौन होगा? अनुभव के आधार पर रविंद्र जडेजा का नाम पहले आता है. लेकिन उनके सामने क्रुणाल पांड्या और विजय शंकर की कड़ी चुनौती होगी.
इंग्लैंड में जब दो स्पिनर, चहल और कुलदीप पहले ही टीम में होंगे, तो क्या तीसरे स्पिनर की ज़रूरत पडेगी? केदार जाधव भी कुछ ओवर स्पिन के करेंगे. ये स्पॉट चयनकर्ताओं का कड़ा इम्तिहान लेगा.
पांचवा सीमर
जसप्रीत बुमराह, भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद शमी और हार्दिक पांड्या तय चार तेज़ गेदबाज़ हैं, बिसात पांचवे सीमर के लिए बिछी हुई है.
पिछले दो साल में भारत की सफलता में सबसे बड़ा हाथ तेज़ गेंदबाज़ी का माना जाता है, ऐसे में पांचवा गेंदबाज़ कहीं कमज़ोर कड़ी न साबित हो?
इस जगह के लिए मोहम्मद खलील, शार्दुल ठाकुर, उमेश यादव, मोहम्मद शिराज़ जैसे गेंदबाज़ सेलेकटर्स की रडार पर रहेंगे. खलील क्योंकि बाएं हाथ के गेंदबाज़ हैं, इसलिए वो अटैक में वैरायटी लाते हैं. शायद इसी वजह से मोहम्मद खलील चुने जा सकते हैं, लेकिन ये तय नहीं है.
वर्ल्ड कप से पहले दो बड़े टूर्नामेंट होने वाले हैं. ऑस्ट्रेलिया की टीम वनडे मैचों के लिए भारत का दौरा करेगी और उसके बाद आईपीएल का टी-20 क्रिकेट होना है. इन दोनों में खिलाड़ियों के पास मौका होगा कि वो शानदार खेल से चयनकर्ताओं का ध्यान अपने उपर खींचें.
Friday, February 1, 2019
तीसरे वनडे में न्यूजीलैंड ने 8 विकेट से हराया, भारत ने 2-1 से सीरीज जीती
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ हैमिल्टन वनडे गंवा दिया है, लेकिन तीन मैचों की सीरीज 2-1 से जीत ली। सेडन पार्क मैदान पर खेले तीसरे मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 8 विकेट से हराया। मैच में मेजबान कीवी टीम ने टॉस जीतकर गेंदबाजी की। भारत ने बल्लेबाजी करते हुए दीप्ति शर्मा (52) की अर्ध्दशतकीय पारी के बदौलत 149 रन बनाए। इसके बाद कीवी टीम ने 2 विकेट खोकर 29.2 ओवर में ही 153 रन बनाते हुए मैच जीत लिया।
टॉस हारने के बाद भारत की शुरुआत भी बेहद खराब रही। टीम ने 39 रन पर ही तीन विकेट गंवा दिए थे। स्मृति मंधाना (1), जेम्मिाह रोड्रीगेज (12) और कप्तान मिताली राज (9) पवेलियन लौट गई थीं। टीम के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाली दीप्ती शर्मा (52) और हरमनप्रीत कौर (24) ने टीम को संभाला और स्कोर 87 तक पहुंचाया। यहां हरमनप्रीत आउट हो गईं। उन्हें पेटरसन ने बोल्ड किया। इनके बाद डायलान हेमलता (13) ने दीप्ती का अच्छा साथ दिया और पांचवें विकेट के लिए 30 रन जोड़े। 117 के कुल स्कोर पर हेमलता और फिर तान्या भाटिया (0) पवेलियन लौट लीं। इसके बाद पूरी टीम महज 149 रन पर ऑलआउट हो गई।
न्यूजीलैंड की ओर से एना पेटरसन और ली ताहुहु की शानदार गेंदबाजी की। पेटरसन ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए, जबकि ताहुहु को 3 विकेट ही मिले। शानदार प्रदर्शन के लिए एना पेटरसन को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी कीवी टीम की भी शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। टीम ने 22 रन पर ही लॉरेन डाउन (10) के रूप में पहला विकेट गंवा दिया था। लॉरेन रनआउट हुईं। इसके बाद कप्तान एमी सैटर्थवाइट (66 नाबाद) और सुजी बतेस (57) ने 84 रन की पार्टनरशिप करते हुए टीम को जीत तक पहुंचाया। इनके अलावा शोफी डेविन 17 रन बनाकर नाबाद रहीं। भारत की ओर से पूनम यादव ही एकमात्र विकेट लेने में कामयाब रहीं।
मिताली राज ने इस सीरीज के दूसरे मैच में 63 रन की पारी खेली थी। भारतीय कप्तान ने 1999 में अपना पहला डेब्यू मैच खेला था। तब से अब तक भारतीय महिला टीम ने कुल 263 वनडे मैच खेले हैं, जिसमें से मिताली 200 मुकाबलों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मिताली ने अब तक 10 टेस्ट और 85 टी-20 मैच खेले हैं।
दुनिया के टॉप-3 महिला खिलाड़ी
मिताली के बाद दूसरे नंबर पर इंग्लैंड की कार्लोट एडवर्ड (1999-2016) हैं। उन्होंने 191 मैच में 38.16 की औसत से 5992 रन बनाए। इसमें 9 शतक शामिल हैं। इनके अलावा तीसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया की बेलिंडा क्लार्क (1991-2005) ने 118 मैचों में 47.49 की औसत से 4844 रन बनाए। साथ ही 5 शतक भी लगाए।
भारतीय खिलाड़ियों में अंजुम दूसरे नंबर पर
भारतीय खिलाड़ियों में बात करें तो मिताली के बाद अंजुम चौपड़ा (1995-2012) हैं। इन्होंने भारत के लिए 127 मैच खेलकर 31.38 की औसत से 2856 रन बनाए हैं। अंजुम ने एक शतक लगाया है। इनके बाद हरमनप्रीत कौर तीसरे स्थान पर काबिज हैं। हरमनप्रीत ने अब तक 93 मैचों में 34.52 की औसत से 2244 रन बनाए। इसमें 3 शतक शामिल है।
अमेरिका के पेमब्रोक पाइन्स शहर की एक सड़क पर जिस गड्ढे को राहगीर आम टूट-फूट का नतीजा मान रहे थे, जांच में वह 150 फीट लंबी सुरंग निकली। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के मुताबिक, चोरों ने सुरंग को बैंक के बेसमेंट के पास तक खोद लिया था। अब पुलिस इसकी तलाश कर रही है।
टॉस हारने के बाद भारत की शुरुआत भी बेहद खराब रही। टीम ने 39 रन पर ही तीन विकेट गंवा दिए थे। स्मृति मंधाना (1), जेम्मिाह रोड्रीगेज (12) और कप्तान मिताली राज (9) पवेलियन लौट गई थीं। टीम के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाली दीप्ती शर्मा (52) और हरमनप्रीत कौर (24) ने टीम को संभाला और स्कोर 87 तक पहुंचाया। यहां हरमनप्रीत आउट हो गईं। उन्हें पेटरसन ने बोल्ड किया। इनके बाद डायलान हेमलता (13) ने दीप्ती का अच्छा साथ दिया और पांचवें विकेट के लिए 30 रन जोड़े। 117 के कुल स्कोर पर हेमलता और फिर तान्या भाटिया (0) पवेलियन लौट लीं। इसके बाद पूरी टीम महज 149 रन पर ऑलआउट हो गई।
न्यूजीलैंड की ओर से एना पेटरसन और ली ताहुहु की शानदार गेंदबाजी की। पेटरसन ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए, जबकि ताहुहु को 3 विकेट ही मिले। शानदार प्रदर्शन के लिए एना पेटरसन को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी कीवी टीम की भी शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। टीम ने 22 रन पर ही लॉरेन डाउन (10) के रूप में पहला विकेट गंवा दिया था। लॉरेन रनआउट हुईं। इसके बाद कप्तान एमी सैटर्थवाइट (66 नाबाद) और सुजी बतेस (57) ने 84 रन की पार्टनरशिप करते हुए टीम को जीत तक पहुंचाया। इनके अलावा शोफी डेविन 17 रन बनाकर नाबाद रहीं। भारत की ओर से पूनम यादव ही एकमात्र विकेट लेने में कामयाब रहीं।
मिताली राज ने इस सीरीज के दूसरे मैच में 63 रन की पारी खेली थी। भारतीय कप्तान ने 1999 में अपना पहला डेब्यू मैच खेला था। तब से अब तक भारतीय महिला टीम ने कुल 263 वनडे मैच खेले हैं, जिसमें से मिताली 200 मुकाबलों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मिताली ने अब तक 10 टेस्ट और 85 टी-20 मैच खेले हैं।
दुनिया के टॉप-3 महिला खिलाड़ी
मिताली के बाद दूसरे नंबर पर इंग्लैंड की कार्लोट एडवर्ड (1999-2016) हैं। उन्होंने 191 मैच में 38.16 की औसत से 5992 रन बनाए। इसमें 9 शतक शामिल हैं। इनके अलावा तीसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया की बेलिंडा क्लार्क (1991-2005) ने 118 मैचों में 47.49 की औसत से 4844 रन बनाए। साथ ही 5 शतक भी लगाए।
भारतीय खिलाड़ियों में अंजुम दूसरे नंबर पर
भारतीय खिलाड़ियों में बात करें तो मिताली के बाद अंजुम चौपड़ा (1995-2012) हैं। इन्होंने भारत के लिए 127 मैच खेलकर 31.38 की औसत से 2856 रन बनाए हैं। अंजुम ने एक शतक लगाया है। इनके बाद हरमनप्रीत कौर तीसरे स्थान पर काबिज हैं। हरमनप्रीत ने अब तक 93 मैचों में 34.52 की औसत से 2244 रन बनाए। इसमें 3 शतक शामिल है।
अमेरिका के पेमब्रोक पाइन्स शहर की एक सड़क पर जिस गड्ढे को राहगीर आम टूट-फूट का नतीजा मान रहे थे, जांच में वह 150 फीट लंबी सुरंग निकली। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के मुताबिक, चोरों ने सुरंग को बैंक के बेसमेंट के पास तक खोद लिया था। अब पुलिस इसकी तलाश कर रही है।
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