Monday, December 31, 2018

कश्मीरः हिंसा, हत्या, रेप, राजनीति- कैसे बीता 2018?

चरमपंथ से जुड़ी 587 घटनाएं, सुरक्षाबलों से मुठभेड़ में 250 चरमपंथियों की मौत. इनके अलावा मरने वालों में 52 आम नागरिक और 86 सुरक्षाबल.

गृह मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक़ साल 2018 कुछ ऐसा रहा जम्मू और कश्मीर के लिए. ये आंकड़े दो दिसंबर, साल 2018 तक के हैं.

हालांकि स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस साल जम्मू कश्मीर में इससे कहीं ज़्यादा लोग हताहत हुए हैं.

चरमपंथी हिंसा के लिहाज़ से 2018 जम्मू और कश्मीर के लिए न सिर्फ़ उथल-पुथल भरा रहा बल्कि सियासी मोर्चे पर भी ये सूबा राजनीतिक स्थिरता की तलाश करता रहा.

कश्मीर की हलचल पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों की राय में बीते एक दशक में इस साल घाटी ने सबसे ज़्यादा हिंसक घटनाएं देखीं.

राजनीतिक उथलपुथल, चरमपंथ से जुड़ी परिस्थितियों में भड़की हिंसा के अलावा कठुआ रेप, वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुख़ारी की हत्या जैसी घटनाओं ने भी जम्मू और कश्मीर में माहौल को अशांत किया.

कठुआ रेप केस
साल 2018 की शुरुआत में ही जनवरी में जम्मू के कुठआ में बकरवाल समुदाय की एक आठ साल की बच्ची को अगवा कर गैंग रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई. इस घटना को लेकर जम्मू और कश्मीर में हालात कई दिनों तक तनावपूर्ण रहे.

राज्य विधानसभा से लेकर नेशनल और इंटरनेशनल मीडिया तक इस मामले की गूंज सुनी गई. इस घटना ने सांप्रदायिक रंग ले लिया. कई दिनों तक कश्मीर में बच्ची को इंसाफ़ दिलाने के लिए प्रदर्शन होते रहे.

जबकि जम्मू में अभियुक्तों के समर्थन में हिंदू एकता मंच के साथ मिलकर बीजेपी के नेताओं ने रैली निकाली थी.

अभियुक्तों के समर्थन में रैली निकालने के बाद और रैली में बीजेपी के नेताओं के शामिल होने पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के दबाव की वजह से दो मंत्रियों को पद छोड़ना पड़ा.

हिंदू एकता मंच और बीजेपी के नेता घटना की सीबीआई जाँच की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गए.

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जाँच की मांग ख़ारिज करते हुए केस की सुनवाई राज्य से बाहर पंजाब शिफ्ट कर दी , जहां 31 मई 2018 से केस का ट्रायल चल रहा है.

पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या
इस साल जून में वरिष्ठ पत्रकार और राइज़िंग कश्मीर नाम के अख़बार के संपादक शुजात बुखारी की श्रीनगर में अनजान बंदूक धारियों ने गोली मार कर हत्या कर दी.

पुलिस ने इस हत्या लिए चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा को ज़िम्मेदार ठहराया.

बाद में पुलिस ने दावा किया कि शुजात की हत्या के दो अभियुक्तों को मुठभेड़ में मार दिया गया है.

महबूबा सरकार का गिरना

राज्य में जारी हिंसा के बीच 19 जून को अचानक बीजेपी ने अपनी सहयोगी पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया.

समर्थन वापस लेने के बाद राज्य में महबूबा मुफ़्ती के नेतृत्व वाली बीजेपी-पीडीपी की गठबंधन सरकार गिर गई.

सरकार गिरने के बाद राज्य में राज्यपाल शासन लगा दिया गया. राज्य में आए नए राज्यपाल सत्यपाल मालिक को एनएन वोहरा की जगह राज्यपाल बनाया गया. जून में एनएन वोहरा के दस साल पूरे चुके थे.

राज्य में छह महीने तक चलने वाला राज्यपाल शासन 20 दिसंबर को समाप्त हो गया. 20 दिसंबर को राज्य में क़रीब 21 साल के बाद एक बार फिर राष्ट्रपति शासन लागू किया गया है.

Wednesday, December 26, 2018

दाखिले के लिए आधार मांग रहे स्‍कूल, UIDAI ने कहा-यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI)ने स्‍कूलों से कहा है कि बच्चों के दाखिले से पहले 12 अंकों वाली बायोमीट्रिक संख्या मुहैया कराने की शर्त नहीं रखें. यूआईडीएआई ने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसा करना उच्चतम न्यायालय के हालिया आदेश के खिलाफ होगा. यूआईडीएआई ने यह चेतावनी ऐसे समय में दी है जब दिल्ली के 1,500 से अधिक निजी स्कूलों में नर्सरी और प्रवेश स्तर की अन्य कक्षाओं के लिए दाखिले की प्रक्रिया शुरू हुई है.

क्‍यों दी चेतावनी

ऐसी खबरें हैं कि कुछ स्कूल दाखिले के लिए आवश्यक दस्तावेजों के नाम पर आधार की भी मांग कर रहे हैं. यूआईडीएआई ने कहा है कि उसे भी इस तरह की खबरें मिली हैं. यूआईडीएआई के सीईओ अजय भूषण पांडेय ने कहा, ‘‘यह ठीक नहीं है. यह कानून के प्रावधानों के अनुसार नहीं है. स्कूलों में दाखिले तथा बच्चों की अन्य सुविधाओं के लिये आधार मुहैया कराना अनिवार्य नहीं किया जा सकता है.’’ यूआईडीएआई ने स्कूलों तथा उनके प्रबंधन को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी भी बच्चे को आधार के चलते दाखिले से वंचित नहीं रहना पड़े.

प्रवेश के बाद आधार कार्ड बनवाया जाए

उन्होंने कहा, ‘‘स्‍कूलों को चाहिए कि वे बच्चों को बिना आधार के प्रवेश दें और यह सुनिश्चित करें कि प्रवेश के बाद विशेष शिविर लगाकर उनका आधार कार्ड बनवाया जाए.’’ यह पूछे जाने पर कि आधार की मांग पर अड़े रहने वाले स्कूलों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई होगी, पांडेय ने कहा कि यह सीधा-सीधा उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवहेलना होगी.

क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में फैसला सुनाते हुए आधार कार्ड को संवैधानिक तो बताया लेकिन इसकी अनिवार्यता पर सवाल खड़े किए. कोर्ट के आदेश के बाद स्‍कूलों और अलग-अगल परीक्षाओं में आधार की अनिवार्यता को समाप्‍त कर दिया गया है. इसके अलावा मोबाइल नंबर लेने, बैंक खाता खुलवाने के लिए आधार कार्ड का होना अनिवार्य नहीं रह गया है. हालांकि आयकर रिटर्न भरने के लिए आधार कार्ड अभी भी जरूरी है.

गौरतलब है कि युनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बैंकों के विलय के विरोध में 26 दिसंबर को हड़ताल का आह्वान किया है, यूएफबीयू शीर्ष नौ बैंक संघों की एक ईकाई है.

फिल्म में राजकुमार एक संघर्षरत गुजराती व्यवसायी के रूप में दिखेंगे और मौनी उनकी पत्नी के किरदार में दिखेंगी. गुजराती निर्देशक मिखिल मुसले की यह पहली बॉलीवुड फिल्म है. वर्ष 2016 की उनकी गुजराती थ्रिलर-फिल्म 'रॉन्ग साइड राजू' को सर्वश्रेष्ठ गुजराती फीचर फिल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

बता दें राजकुमार राव के ल‍िए साल 2018 सफलता के नए आयाम लेकर आया है. उनकी कई फिल्मों ने बॉक्स ऑफ‍िस पर शानदार प्रदर्शन किया. इनमें न्यूटन, स्त्री जैसी फिल्में शामिल हैं. साल 2019 में राजकुमार राव सोनम कपूर के साथ फिल्म एक लड़की को देखा... में नजर आने वाले हैं.

Sunday, December 16, 2018

पाकिस्तान की जेल से 6 साल बाद छूटकर भारत लौटेंगे हामिद निहाल अंसारी

जासूसी और बिना दस्तावेज़ों के पाकिस्तान यात्रा करने के अपराध में पाकिस्तानी जेल में क़ैद भारतीय नागरिक हामिद निहाल अंसारी की तीन साल क़ैद की सज़ा 16 दिसंबर को पूरी हो रही है.

पेशावर हाईकोर्ट ने हामिद अंसारी को यात्रा से जुड़े दस्तावेज़ जल्द से जल्द मुहैया कराने का आदेश दिया है ताकि उन्हें भारत भेजना संभव हो सके.

कथित तौर पर साल 2012 में फ़ेसबुक पर हुई दोस्ती ने उन्हें ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से अफ़ग़ानिस्तान होते हुए पाकिस्तान पहुंचा दिया. इसके छह साल बाद उनके अपने वतन लौटने की संभावना बन रही है.

हामिद अंसारी को नवंबर 2012 में पाकिस्तान के कोहाट में हिरासत में लिया गया था. इस समय वो मरदान जेल में क़ैद हैं और अपनी रिहाई का इंतज़ार कर रहे हैं.

लड़की से दोस्ती का एंगल
33 साल के हामिद अंसारी मुंबई के रहने वाले हैं. उनके पास मैनेजमेंट साइंस की डिग्री है और उनके परिवार के मुताबिक़, लापता होने से चंद दिन पहले ही उन्होंने मुंबई के कॉलेज में लेक्चरर की नौकरी शुरू की थी.

उनकी मां फ़ौज़िया अंसारी मुंबई में हिंदी की प्रोफ़ेसर हैं और कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल हैं. उनके पिता निहाल अंसारी बैंकर हैं जबकि उनके बड़े भाई डेंटिस्ट हैं.

पाकिस्तान और भारत के बीच क़ैदियों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता जतिन देसाई ने बीबीसी से कहा, "हामिद ने कई बार पाकिस्तान जाने की ख़्वाहिश का इज़हार किया था लेकिन उन्हें वीज़ा नहीं मिल सका था."

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान जाने से पहले उनकी कई बार हामिद से मुलाक़ात हुई थी और तब ऐसा लगता था कि वो पाकिस्तान जाने पर अड़े थे.

जतिन देसाई के मुताबिक हामिद अंसारी की फ़ेसबुक पर कोहाट की एक लड़की से दोस्ती हुई थी और वो उसी से मिलने पाकिस्तान जाना चाहते थे.

जतिन के मुताबिक हामिद ने कई बार पाकिस्तान का वीज़ा हासिल करने की नाकाम कोशिश की और इसके बाद उन्होंने कोहाट के स्थानीय लोगों से फ़ेसबुक पर संपर्क किया.

चार नवंबर 2012 को हामिद अंसारी ने मुंबई से काबुल के लिए फ़्लाइट ली. उन्होंने अपने परिजनों को बताया था वो एक हवाई कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए जा रहे हैं.

उन्हें 15 नवंबर को घर लौटना था लेकिन काबुल पहुंचने के कुछ दिन बाद घर वालों से उनका संपर्क टूट गया. उनका फ़ोन बंद होने के बाद घर वालों को कुछ संदेह हुआ.

कथित तौर पर इस दौरान हामिद अंसारी काबुल से जलालाबाद गए और वहां से यात्रा के दस्तावेज़ और पासपोर्ट के बिना तोरख़म के रास्ते पाकिस्तान में दाख़िल हुए. वो कुर्क में रुके और कोहाट पहुंचे.

पुलिस का कहना है कि कोहाट के होटल में कमरा लेने के लिए उन्होंने हमज़ा नाम का जाली पहचान पत्र इस्तेमाल किया और उसी दिन पुलिस ने शक़ की बुनियाद पर उन्हें हिरासत में ले लिया.

दूसरी ओर उनके परिवार का कहना है कि जब हामिद अंसारी से बात नहीं हुई तो उन्होंने उनका लैपटॉप देखा और उनके ईमेल और फ़ेसबुक पर होने वाली बातचीत पढ़ी.

उनके परिवार के मुताबिक फ़ेसबुक की बातचीत से ये पता चला कि वो पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत के कोहाट की किसी लड़की से बात करते हैं और उसे से मिलने के लिए वहां जाना चाहते थे.

इसके बाद हामिद की मां ने दावा किया था कि उनके बेटे ने फ़ेसबुक पर कुछ पाकिस्तानी लोगों से भी बात की थी और उन्हीं के कहने पर ये रास्ता चुना था.

दूसरी ओर, पाकिस्तान के सरकारी सूचना विभाग के मुताबिक हामिद अंसारी ने पूछताछ में स्वीकार किया था कि वो ग़ैरक़ानूनी तौर पर अफ़ग़ानिस्तान से तोरख़म के रास्ते पाकिस्तान में दाख़िल हुए.

Thursday, December 13, 2018

इमर्जिंग टीम्स कप: भारत ने PAK को हरा फाइनल में बनाई जगह

भारत ने एशियन क्रिकेट काउंसिल इमर्जिंग टीम्स कप के फाइनल में जगह बना ली है. गुरुवार को सेमीफाइनल में उसने पाकिस्तान को 7 विकेट से मात दी. अब फाइनल में 15 दिसंबर को इंडिया इमर्जिंग टीम का मुकाबला बांग्लादेश और श्रीलंका के बीच के खेले जा रहे दूसरे सेमीफाइनल की विजेता टीम से होगा.

कोलंबो क्रिकेट क्लब ग्राउंड में इंडिया इमर्जिंग टीम ने 173 रनों का लक्ष्य 135 गेंदें शेष रहते 3 विकेट खोकर हासिल कर लिया. हिम्मत सिंह ने 28वें ओवर की तीसरी गेंद पर छक्का जड़कर टीम को जीत दिलाई.

निर्धारित 50 ओवरों के मुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान इमर्जिंग टीम 44.4 ओवरों में 172 रनों पर सिमट गई. एक समय पाकिस्तानी टीम ने 42 रन पर 4 विकेट गंवा दिए थे. लेकिन कप्तान मोहम्मद रिजवान (67) और सऊद शकील (62) की अर्धशतकीय पारियों के दम पर टीम पूरी तरह बिखरने से बच गई.

भारत की ओर से 21 साल के लेग स्पिनर मयंक मार्कंडेय ने 4 विकेट झटके, उनका गेंदबाजी विश्लेषण 9.4-0-38-4 रहा. अंकित राजपूत और जयंत यादव ने 2-2 विकेट निकाले.

लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को भी शुरुआती झटके लगे. टीम ने 52 रन पर 3 विकेट गंवा दिए थे. इसके बाद हिम्मत सिंह (नाबाद 59) और नीतीश राणा (नाबाद 60) ने इंडिया इमर्जिंग टीम को और कोई झटका नहीं लगने दिया. टीम ने 27.3 ओवरों 178/3 रन बनाकर जीत हासिल कर ली.

दूसरे ट्वीट में एक्ट्रेस ने लिखा- ''क्या कोई इस नए चमकदार लोहे के टुकड़े को 18,000 रुपए में खरीदना चाहेगा. चिंता मत करो, मैं इसे बेच रही हूं अमेजन नहीं. इसलिए आपको वहीं मिलेगा जो आपने ऑर्डर किया होगा.''

एक्ट्रेस के ट्वीट के बाद तुरंत अमेजन ने भी जवाब दिया. लिखा- ''ये स्वीकार नहीं किया जा सकता. आपके हालिया शॉपिंग अनुभव के लिए हमें खेद है. हमारी सपोर्ट टीम से बातचीत के अनुभव के लिए भी हम माफी चाहते हैं. कृपया जानकारी शेयर करें. हम आपसे सीधे संपर्क करेंगे.''

सोनाक्षी सिन्हा के साथ हुए इस बुरे अनुभव के बाद ट्विटर पर मौजूद यूजर्स ने भी अमेजन की क्लास लगाई. एक्ट्रेस को सपोर्ट करते हुए ऑनलाइन शॉपिंग एप को जमकर लताड़ा. दूसरी तरफ, सोनाक्षी के वर्कफ्रंट की बात करें तो उनकी पिछली रिलीज हैप्पी फिर भाग जाएगी ने बॉक्स ऑफिस पर ठीक ठाक कलेक्शन किया था. उनकी आगामी फिल्मों में टोटल धमाल, कलंक और मिशन मंगल शामिल हैं.

Galaxy S10 के अलग अलग सटोरेज वेरिएंट्स होंगे. इनमें 128GB, 512GBहोंगे. कीमतें भी लीक हुई हैं. 128GB वर्जन की कीमत £899 (लगभग 81,503 रुपये) हो सकती है. दूसरे वेरिएंट की कीमत £899 (लगभग 99,634 रुपये) हो सकती है. यानी इस बार कीमतों के मामलों में यह आईफोन को टक्कर दे सकता है, क्योंकि ऐसा लगता है जैसे भारत में भी यह इसी कीमत पर आएगा लाख रुपये देने ही होंगे. 

Monday, December 10, 2018

आठवले को भरी सभा में थप्पड़ जड़ने वाले की धुनाई, महाराष्ट्र बंद का ऐलान

महाराष्ट्र में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामदास अाठवले के साथ भरी सभा में मारपीट की गई है. मुंबई से सटे ठाणे में एक कार्यक्रम में उन्हें एक युवक ने थप्पड़ जड़ दिया. यह घटना पुलिस की मौजूदगी में ठाणे के अंबरनाथ में हुई. थप्पड़ मारने वाले शख्स का नाम प्रवीण गोसावी है. इस घटना के बाद अाठवले समर्थकों ने उसे पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई की.

पुलिस ने बताया कि रामदास अाठवले शनिवार रात ठाणे के अंबरनाथ में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने गए थे. उन पर हमला उस समय हुआ, जब वो मंच से नीचे उतर रहे थे. थप्पड़ मारने के बाद वह भागने लगा, तो अाठवले के समर्थकों ने उसे पकड़ लिया और उसकी जमकर धुनाई कर दी. पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

पुलिस ने बताया कि आठवले के समर्थकों की धुनाई से  चोटिल हुए हमलवार को प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस का कहना है कि हमले की वजह साफ नहीं हो पाई है. फिलहाल मामले की जांच की जा रही है.

बता दें कि मराठा आरक्षण पर रामदास अाठवले ने कहा था कि मराठा समाज को दिया गया आरक्षण कोर्ट में नहीं टिक सकेगा. वह चाहते है कि मराठा समाज को आरक्षण दिया जाए, लेकिन राज्य सरकार ने जिस तरह से आरक्षण दिया है, वह कानूनी नहीं है. अठावले पर हुआ हमला उनके इस बयान से जोड़कर देखा जा रहा है.

इससे पहले गुजरात के सूरत में रामदास आठवले पर एक कार्यक्रम के दौरान एक युवक ने काला कपड़ा फेंका था. जब आठवले एक कार्यक्रम में केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिना रहे थे, तभी यह युवक उनकी कुर्सी के पीछे आकर खड़ा हो गया था. केंद्रीय राज्यमंत्री मीडिया के सामने बोल रहे थे, तभी इस युवक ने अपनी जेब से काला कपड़ा निकाला और उनकी तरफ फेंकते हुए नारेबाजी शुरू कर दी थी. यह सब मीडिया के सामने हुआ था.

अाठवले ने कहा- हमले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार हो

अाठवले ने आरोप लगाया है कि उन पर हमले की साजिश पहले से रच ली गई थी. इस हमले के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया जाना चाहिए. हमने 9 दिसंबर को महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया है. उधर, हमले के बाद अाठवले के समर्थक उनके घर के बाहर एकजुट हो गए. माना जा रहा है कि मामले को लेकर आज अाठवले की पार्टी और उनके समर्थक सड़क पर उतरेंगे.

Wednesday, December 5, 2018

कुंभकरण लिफ्ट योजना! राजस्थान में फिर फिसली राहुल की जुबान

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर अपने बयान के चलते ट्रोल हो रहे हैं. राजस्थान के झुंझुनू के सूरजगढ़ विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी श्रवण कुमार के समर्थन में बुहाना में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उनकी जुबान फिसल गई. इसके चलते राहुल और पार्टी दोनों की जमकर फजीहत हो रही है.

राहुल गांधी ने कुंभाराम लिफ्ट योजना को कुंभकरण लिफ्ट योजना कह दिया, जिसके बाद पांडाल में हंसी के ठहाके गूंज पड़े.  दरअसल, राहुल पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा झुंझुनू जिले में कराए गए विकास कार्यों को गिनाते हुए मीठे पानी के लिए कुंभाराम लिफ्ट कैनाल परियोजना के जिक्र करना चाह रहे थे, लेकिन उन्होंने  कुंभाराम लिफ्ट कैनाल योजना की जगह कुंभकरण लिफ्ट योजना कह डाला

मंच पर मौजूद कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व जलदाय मंत्री एवं खेतड़ी विधानसभा से कांग्रेस के प्रत्याशी डॉ. जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी को योजना का सही नाम बताया. इसके बाद राहुल ने अपनी इस गलती को तुरंत सुधार करते हुए परियोजना के नाम का सही उच्चारण किया.
इसके बाद राहुल ने कहा कि उन्होंने पहले फेज में इस योजना के लिए 955 करोड़ रुपये दिए. 3,200 करोड़ रुपये झुंझुनू और आसपास के जिलों के लिए दिया था. बीजेपी ने पांच साल में कुछ नहीं किया.

बता दें कि राहुल गांधी इससे पहले भी जुबान फिसल जाने के चलते कई बार ट्रोल हो चुके हैं. इससे पहले उन्होंने राजस्थान में ही किसान दवा की फैक्ट्री में फसल बेचने जैसा बयान दिया था. यूपी में उन्होंने आलू की फैक्ट्री वाला बयान दिया था. इस पर वो काफी ट्रोल हुए थे.  छत्तीसगढ़ में एक रैली के दौरान उन्होंने BHEL को मोबाइल निर्माता कंपनी बताई थी. उन्होंने कहा था कि ये जो मोबाइल है, ये इन्होंने BHELसे क्यों नहीं खरीदा? राहुल गांधी ने BHEL दो-तीन बार दोहराया.

प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के अध्यक्ष को अपनी पार्टी के नेताओं के नाम, युगों के नाम कुछ नहीं पता है. कांग्रेस के नेता कुंभाराम में इनके अध्यक्ष को कुंभकरण दिखाई देता है, ये कुंभकरण के गीत गाते रहते हैं. तो सोते ही रहेंगे. बता दें कि राहुल गांधी ने एक रैली में कुंभाराम योजना को कुंभकरण योजना कहा था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर दम हो तो राहुल गांधी अपनी पार्टी के सभी अध्यक्षों के नाम एक क्रम में बिना कागज लिए बता दें.

बता दें कि मंगलवार को भी प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान में तीन रैलियों को संबोधित किया था. मंगलवार को पीएम मोदी हनुमानगढ़, सीकर और फिर जयपुर पहुंचे थे.

गौरतलब है कि राजस्थान की 200 विधानसभा सीटों में से 199 पर 7 दिसंबर को मतदान होना है. एक सीट पर मतदान प्रत्याशी के निधन होने के कारण नहीं हो पाएगा, राज्य के चुनावी नतीजे 11 दिसंबर को अन्य राज्यों के साथ ही आएंगे.

Monday, November 19, 2018

केसरी को हटाने की साज़िश सोनिया नहीं, प्रणब के घर रची गई थी

सीताराम केसरी को कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटाए जाने के 20 साल बाद अचानक इस बारे में कहा और लिखा जा रहा है.

छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रचार के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महासमंद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "देश को पता है. सीताराम केसरी, दलित, पीड़ित, शोषित समाज से आए हुए व्यक्ति को पार्टी के अध्यक्ष पद से कैसे हटाया गया. कैसे बाथरूम में बंद कर दिया गया था. कैसे दरवाज़े से हटा कर, उठा कर फ़ुटपाथ पर फेंक दिया गया था. और मैडम सोनिया जी को बैठा दिया गया था. ये इतिहास हिंदुस्तान भली-भांति जानता है. उनको मजबूरी में बनाया था, उसको भी वो दो साल झेल नहीं पाए."

इन तथ्यों को जांचने के लिए और सबसे पुरानी पार्टी में उस वक्त चल रही हलचल को समझने के लिए हमें दोबारा इस मामले को याद करना होगा.

दरअसल, केसरी दलित थे ही नहीं और ना ही वो उस वक्त पार्टी के भीतर बेहद लोकप्रिय थे जब 14 मार्च 1998 में असंवैधानिक तख्तापलट की साजिश रची गई.

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जितेंद्र प्रसाद, के करुणाकरन, शरद पवार, अर्जुन सिंह और कांग्रेस वर्किंग समिति के लगभग सभी सदस्य केसरी से निजात पाना चाहते थे और उन्हें हटाने में इन सभी की भागीदारी रही.

हालांकि ये भी सच है कि केसरी और उनके समर्थकों ने सोनिया को पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाने से रोकने की हर तरह की कोशिश की थी.

केसरी के एक करीबी ने एक प्रतिष्ठित अख़बार के कॉलम में लिखा था कि सोनिया को इस तरह की ओछी राजनीति करने की बजाय इटली वापस लौट जाना चाहिए और एक अच्छी नानी मां की भूमिका निभानी चाहिए.

सितंबर 1996 से मार्च 1998 तक पार्टी अध्यक्ष रहे केसरी के साथ कई समस्याएं थीं. दक्षिण और उत्तर-पूर्व के नेताओं को उनसे बातचीत करने में समस्या पेश आती थी क्योंकि वो अंग्रेज़ी नहीं जानते थे. उत्तर भारत के कांग्रेस के उच्च जाति के कई नेताओं ने उन्हें अपना नेता माना ही नहीं, क्योंकि केसरी पिछड़ी जाति के थे.

केसरी भी कांग्रेस के उत्तर भारत के ब्राह्मण और ठाकुरों को पसंद नहीं करते थे. ये बात भी जगज़ाहिर थी.

इसके अलावा केसरी लालू प्रसाद यादव, कांशी राम और मुलायम सिंह यादव जैसे नेताओं के साथ महागठबंधन करना चाहते थे, जबकि कांग्रेस उस वक्त भी ख़ुद को पूरे देश का नेतृत्व करने वाली पार्टी मानती थी और गठबंधन में उसकी ख़ास रुचि नहीं थी.

लोकसभा चुनाव हारने के बाद अपने अस्तित्व को बचाने की कोशिश कर रहे ऊंची जाति के कई कांग्रेसी नेताओं को केसरी के विचार और हतोत्साहित कर रहे थे.

Sunday, November 18, 2018

ऐड गुरु और थिएटर आर्टिस्ट एलेक पद्मसी का निधन

एलेक पद्मसी भारतीय विज्ञापन जगत के उन चुनिंदा लोगों में शुमार थे जिन्होंने भारतीय विज्ञापनों की दुनिया को एक वैश्विक पहचान दी.

उनके सबसे यादगार विज्ञापनों में 'हमारा बजाज' और 'लिरिल गर्ल' जैसे विज्ञापन शामिल हैं जो आज भी लोगों के ज़हन में अपनी जगह बनाए हुए हैं.

आज़ाद सोच और जवां अंदाज़ के साथ ज़िंदगी जीने वाले एलेक पद्मसी ने 90 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह दिया.

सोशल मीडिया पर उनकी मौत की ख़बर आने के बाद मनोरंजन क्षेत्र से लेकर राजनीति और पत्रकारिता जगत के लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देना शुरू कर दिया है.

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने पद्मसी को याद करते हुए लिखा है, "हमारे विज्ञापन जगत की सबसे महान व्यक्ति, क्रिएटिव गुरू और थिएटर पर्सनालिटी एलेक पद्मसी की मौत के बारे में जानकर बेहद दुख हुआ. मेरी संवेदना उनके परिवार, दोस्तों और सहयोगियों के साथ है."

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अभिनेता बोमन ईरानी ने भी पद्मसी को अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा है, "ए़ड गुरु और थिएटर की दुनिया के महारथी पद्मसी की मौत की ख़बर सुनकर बेहद दुखी हूं. थिएटर की दुनिया में मुझे पहला ब्रेक उन्होंने ही दिया. उन जैसा अब कोई नहीं होगा."

कौन थे एलेक पद्मसी?
साल 1928 में एक गुजराती परिवार में पैदा होने वाले एलेक पद्मसी को विज्ञापन की दुनिया का पितामह कहा जाता था.

'एडवरटाइज़िंग मैन ऑफ़ द सेंचुरी' कहे जाने वाले एलेक पद्मसी को साल 1999 में पद्मश्री सम्मान से भी नवाज़ा गया.

एडवरटाइज़िंग क्षेत्र से जुड़े लोग बताते हैं कि अस्सी के दशक में एडवरटाइज़िंग क्षेत्र के लोगों के बीच एक चुटकुला प्रचलित था.

कहा जाता था कि अगर आपको गॉड तक पहुंचना है तो पोप के पास जाना ही होगा.

इस जोक के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है.

कहा जाता है कि अस्सी के दशक में एलेक को 'गॉड' कहा जाता था और उनकी एक सेक्रेटरी भी हुआ करती थीं जिनका उपनाम पोप होता था.

विज्ञापन जगत में एक लंबा समय गुजारने वाले एलेक पद्मसी कहते थे कि आइकॉनिक ब्रांड्स वो होते हैं जो कंपनियों के ख़त्म होने के बाद भी लोगों के ज़हन में बने रहते हैं.

एलेक पद्मसी ऐसे ही 100 ब्रांड्स को अस्तित्व में लेकर आए.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

उन्होंने अपंग बच्चों पर एक शॉर्ट फ़िल्म 'स्टोरी ऑफ़ होप' भी बनाई जिसे विज्ञापन की दुनिया के ऑस्कर अवॉर्ड कहे जाने वाले इंटरनेशनल स्लियो हॉल ऑफ़ फेम में शामिल किया गया.

विज्ञापन की दुनिया में ये सम्मान पाने वाले एलेक पद्मसी अकेले भारतीय थे.

जब सफ़दर की हत्या पर दिल्ली की सड़कों पर उतरे हज़ारों लोग
सऊदी अरब में होगी सिनेमा की वापसी?
दो ज़िंदगियां जीने वाले पद्मसी
एलेक पद्मसी को विज्ञापन की दुनिया का बेताज बादशाह कहा जाता है.

लेकिन उन्होंने थिएटर और सिनेमा की दुनिया में भी ऐसा काम किया जिससे लोग हैरत में पड़ जाते हैं.

Friday, November 16, 2018

इतिहास की सबसे बड़ी आग से 63 की मौत, दोबारा बसाना पड़ेगा एक पूरा शहर

अमेरिका के कैलिफोर्निया के जंगलों में भड़की आग पिछले एक हफ्ते में 63 लोगों की जान ले चुकी है। राज्य भर में अब तक करीब 12 हजार इमारतें खाक हुई हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 631 लोग लापता हैं। आग से हुए नुकसान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य का पैराडाइज शहर पूरी तरह तबाह हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि शहर को दोबारा बसाने में कई साल लग सकते हैं।

तेज हवाओं की वजह से नए इलाकों में फैल रही आग
पूरे राज्य में आग से निपटने के लिए 9400 दमकलकर्मी लगाए गए हैं। हालांकि, तेज हवाओं की वजह से आग तेजी से नए इलाकों में फैल रही है। इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी के प्रमुख ब्रॉक लॉन्ग ने बताया कि पैराडाइज के लिए यह सबसे खराब आपदा थी।

लापता लोगों को ढूंढने के लिए फोरेंसिक टीम सेना और खोजी कुत्तों की मदद ले रही है। सर्च ऑपरेशन में भी कई हफ्तों का समय लग सकता है। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प शनिवार को प्रभावित इलाकों का दौरा कर सकते हैं।

तीन दिन में लापता लोगों की संख्या दो गुनी
दो दिन पहले जारी आधिकारिक लिस्ट में करीब 300 लोगों के लापता होने की बात सामने आई थी। हालांकि, गुरुवार को नई लिस्ट में 631 लोग लापता बताए गए। बट काउंटी के शेरिफ कोरी होने ने बताया कि इसकी वजह अधिकारियों की ओर से की जा रही सघन जांच है।

8 नवंबर को आग शुरू होने के बाद से जितने लोगों ने इमरजेंसी सर्विस को फोन लगाया था उनकी जांच के बाद ही नई लिस्ट जारी की गई। होने ने कहा कि आने वाले दिनों में लापताओं की संख्या और बढ़ सकती है

दमकलकर्मियों ने 40% आग पर काबू पाया
कैलिफोर्निया के दमकल विभाग के मुताबिक, अब तक 40% आग पर काबू पा लिया गया है। अफसरों का कहना है कि ऑपरेशन तेजी से चलाने के बावजूद महीने के अंत तक इस पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सकता। आग की वजह से करीब 1,45,000 एकड़ का इलाका बर्बाद हो चुका है।

गैस और बिजली कंपनियों के खिलाफ लोगों ने दायर की याचिका
अधिकारियों ने आग लगने की वजहों का कोई खुलासा नहीं किया। कुछ लोगों ने कैलिफोेर्निया की पैसिफिक गैस और इलेक्ट्रिक कंपनी के खिलाफ याचिका दायर कीहै। पैसिफिक के स्टॉक अब तक 31% तक गिर चुके हैं। इसकी वजह से बाजार को 16 अरब डॉलर तक का नुकसान हुआ है। सोमवार को राज्य की पब्लिक यूटिलिटी कमीशन ने दो बिजली कंपनियों पीजी एंड ई और सदर्न कैलिफोर्निया एडिसन  के खिलाफ जांच का ऐलान किया था।

Sunday, November 11, 2018

मतदान से एक दिन पहले संदिग्ध माओवादियों के छह धमाके, एक जवान की मौत

छत्तीसगढ़ के कांकेर में विधानसभा चुनाव के लिए होने वाले मतदान से एक दिन पहले संदिग्ध माओवादियों ने लगातार छह आईईडी विस्फोट किए, जिसमें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक सब-इंस्पेक्टर की मौत हो गई.

इन विस्फोटों में ज़िला पुलिस बल के एक जवान के घायल होने की भी ख़बर है.

दूसरी ओर बीजापुर ज़िले में पुलिस ने मुठभेड़ में एक कथित माओवादी के मारे जाने का दावा किया है.

बीएसएफ़ की 35वीं बटालियन के थे जवान

नक्सल मामलों के डीआईजी सुंदरराज पी के अनुसार,"सीमा सुरक्षा बल की एक टुकड़ी एरिया डॉमिनेशन के लिए निकली थी, जहां माओवादियों द्वारा किए गये सीरियल ब्लास्ट की चपेट में आकर एक सब इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह की मौत हो गई."

पुलिस के अनुसार सीमा सुरक्षा बल की 35वीं बटालियन के जवान कोइलीबेड़ा थाना क्षेत्र के उदनपुर और गट्टाकाल के बीच ऑपरेशन के लिए निकले थे, जहां वे पहले से ही सड़क पर लगाए गए विस्फोटकों की चपेट में आ गए.

इधर एक अन्य घटना में बीजापुर के बेदरे में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में एक कथित माओवादी के मारे जाने का दावा किया है. पुलिस के अनुसार मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने एक राइफल के अलावा दूसरी संदिग्ध चीज़ें बरामद की हैं.

पुलिस ने सुकमा ज़िले के कन्हइगुड़ा में भी आठ किलो से अधिक का इंप्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस बरामद किया है.

लगातार हिंसक घटनाएं

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव क़रीब आने के साथ माओवादी हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं. बीते पंद्रह दिनों में माओवादियों की हिंसा में सुरक्षाबलों के 8 जवानों समेत कुल 16 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. इस दौरान सुरक्षाबलों ने 300 से भी अधिक जगहों से बारूदी सुरंग या आईईडी बरामद की है.

हालांकि शनिवार को ही छत्तीसगढ़ के लिए पार्टी का संकल्प पत्र जारी करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दावा किया था कि रमन सिंह सरकार ने प्रदेश को 'नक्सलवाद से लगभग मुक्त' कर दिया है.

छत्तीसगढ़ में विधानसभा की 90 में से 18 सीटों पर सोमवार को मतदान होने हैं. बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, सुकमा, बीजापुर और राजनांदगांव ज़िले की 18 सीटों में से अधिकांश मतदान केंद्र माओवादी हिंसा के कारण संवेदनशील या अति संवेदनशील घोषित किए गए हैं. बड़ी संख्या में संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट कर दिया गया है.

31 लाख से अधिक मतदाताओं वाली इन 18 सीटों पर सुरक्षाबलों के लगभग डेढ़ लाख जवान तैनात किए गए हैं.

माओवादी हिंसा को ध्यान में रखते हुए मोहला-मानपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, केशकाल, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोंटा ऐसे क्षेत्र हैं, जहां मतदान के लिए सुबह 7 बजे से दोपहर 3 तीन बजे तक का समय निर्धारित किया गया है.